पक्षियों के बाद अब कछुओं का बसेरा बनेगा केवलादेव
विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अब सिर्फ प्रवासी पक्षियों के लिए ही नहीं बल्कि कछुओं के संरक्षण के लिए भी अपनी खास पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उद्यान प्रशासन ने पहली बार यहां फ्रेश वॉटर टर्टल यानी मीठे पानी में रहने वाले कछुओं का वैज्ञानिक स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया है. इस सर्वे का उद्देश्य केवलादेव में पाई जाने वाली कछुओं की प्रजातियों उनकी संख्या वितरण और आवास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना है.
सर्वे के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उद्यान के किन-किन हिस्सों में कछुओं की मौजूदगी अधिक है और उनके लिए कौन से क्षेत्र सबसे अनुकूल हैं.

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