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श्रीगंगानगर सभापति पद सामान्य होते ही बढ़ी दावेदारों की हलचल


नगर परिषद चुनाव में सभापति पद के आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही श्रीगंगानगर की राजनीति में अचानक गर्माहट बढ़ गई है। सभापति पद अनारक्षित होने से अब किसी भी वर्ग का योग्य उम्मीदवार मैदान में उतर सकता है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से पर्दे के पीछे चल रही राजनीतिक तैयारियां अब खुलकर सामने आने की संभावना हैं। आरक्षण की लॉटरी से पहले जिन नेताओं और संभावित दावेदारों के नाम केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय थे, अब उनमें से कई ने सक्रियता बढ़ाने का मन बना लिया है। कौन चुनाव लड़ेगा, किस दल से टिकट मांगेगा और किसके पीछे पार्षदों का समर्थन जुटेगा? इन सवालों को लेकर जोड़-तोड़ शुरू हो गई है।
राजस्थान नगरपालिकाओं के प्रावधानों के तहत नगर परिषद के अध्यक्ष/सभापति का चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता है और निर्वाचन नियमों में नगर परिषद के अध्यक्ष के चुनाव में पार्षदों की भूमिका स्पष्ट है। 

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