मारवाड़ के 'अंगूर' पीलू की पैदावार में भारी कमी
मारवाड़ क्षेत्र में इस बार प्रसिद्ध 'अंगूरÓ पीलू की पैदावार में भारी कमी देखी गई है। जाल के पेड़ों पर लगने वाले ये फल, जो आमतौर पर इन दिनों बहुतायत में होते थे, इस साल गिने-चुने ही नजर आ रहे हैं। वराडा, देलदर और मंडवारिया के ओरण क्षेत्रों में जाल के पेड़ों की अच्छी संख्या के बावजूद पीलू कम लगे हैं। सिरोही, जालोर और पाली जिलों में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है।
ग्रामीणों के अनुसार, पीलू को सुखाकर दुधारू पशुओं को खिलाया जाता है, जबकि ताजे फल लोग चाव से खाते हैं। रंग-बिरंगे और स्वादिष्ट होने के कारण ग्रामीण इसे इक_ा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे इसे 'मारवाड़ के अंगूरÓ की उपाधि मिली है।

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