देसी इलाज करने वालों के जरिए मरीज तक पहुंचेगी सरकार
देश के ऐसे आदिवासी इलाके, जहां डॉक्टर्स का पहुंचना कठिन है, वहां बीमारी के इलाज के लिए 'जनजाति गुणीजनÓ (देसी इलाज करने वाले और जड़ी-बूटी के जानकार) बनाए जाएंगे। ये खुद इलाज नहीं करेंगे, ये 'गुणीजनÓ मरीज और एम्स के बीच सेतु का काम करेंगे। अगर मरीज इनके पास आता है तो उसे एम्स के जरिए टेलीमेडिसिन से इलाज मिलेगा।
इसके लिए एम्स जोधपुर के सहयोग से सिरोही के आबू रोड में सेटेलाइट ट्राइबल सेंटर के जरिए टेलीमेडिसिन सुविधा प्रदान की जाएगी। इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी प्रदेश में 18 गुणीजन को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। आगे दूसरे गुणीजनों को भी जोड़ा जा रहा है।

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