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महाकाल के शिखर पर लहराएगा ब्रह्म ध्वज, 2000 साल पुरानी विक्रमादित्य की परंपरा होगी जीवंत


उज्जैन की अवंतिका नगरी में 19 मार्च को एक बार फिर इतिहास जीवंत होने जा रहा है। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर शिखर पर भव्य ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उज्जैन की उस प्राचीन विरासत का सम्मान है, जो 2,000 साल पहले सम्राट विक्रमादित्य के काल में शुरू हुई थी। मान्यता है कि न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य ने अपनी विजय और सांस्कृतिक श्रेष्ठता के प्रतीक के रूप में ब्रह्म ध्वज फहराने की परंपरा शुरू की थी। 

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