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महाकाल मंदिर में दो माह चलेगी शीतल जलधारा


विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के आंगन में भीषण गर्मी के आगमन के साथ ही एक प्राचीन और अनूठी परंपरा का श्रीगणेश होने जा रहा है। वैशाख और ज्येष्ठ मास की तपिश से भगवान महाकाल को बचाने के लिए मंदिर प्रशासन और पुजारियों द्वारा 'गलंतिका बंधनÓ की व्यवस्था की गई है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलने वाली इस परंपरा में भगवान महाकाल के शीश पर मिट्टी की मटकियाँ बांधी जाती हैं। इन मटकियों में पवित्र नदियों के जल का आह्वान कर उन्हें भरा जाता है, जिससे निरंतर शीतल जलधारा महादेव पर प्रवाहित होती रहती है। 

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