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अंतरधार्मिक लिव-इन संबंध कानून के तहत अपराध नहीं-हाई कोर्ट


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के मूल अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा है कि अंतर्धार्मिक जोड़े की सुरक्षा आवश्यक है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की पीठ ने सोनभद्र निवासी काजल प्रजापति और फिरोज अहमद की याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतर्धार्मिक लिव-इन रिलेशनशिप किसी भी कानून के तहत प्रतिबंधित या दंडनीय अपराध नहीं है। यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई व्यक्ति उनकी इच्छा के विरुद्ध या धोखे से धर्म परिवर्तन का प्रयास करता है, तो याची उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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