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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शादीशुदा महिला 'शादी के झूठे वादेÓ पर रेप केस क्यों नहीं कर सकती


सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने एक बार फिर शादी के झूठे वादे पर रेप जैसे मामलों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। देश की शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर महिला पहले से शादीशुदा है, तो वह किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ यह कहकर रेप का दावा नहीं कर सकती कि उससे शादी का वादा किया गया था। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सहमति से बने रिश्तों के टूटने के बाद रेप के मामले दर्ज होने पर अदालतें लगातार चिंता जता रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(1) का हवाला दिया। इस धारा के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति का पति या पत्नी जीवित है, तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जब कोई वादा कानूनन संभव ही नहीं है, तो उस वादे के टूटने को रेप का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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