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गर्मी से भगवान जगन्नाथ हुए बीमार, आज 108 घड़ों से करवाया जाएगा स्नान

पुरी के भगवान जगन्नाथ को हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान कराकर शीतलता प्रदान की जाती है। इस स्नान को 'स्नान यात्राÓ कहा जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को 108 कलशों के शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान के बाद भगवान को 15  दिनों तक विश्राम में रखा जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि स्नान के बाद वे बीमार हो जाते हैं। इस दौरान भगवान बलभद्र, जगन्नाथ जी और सुभद्रा जी बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। ये स्नान 108 स्वर्णिम घड़ों से कराया जाता है। उन घड़ों में जो जल भरा होता है वो सारे तीर्थों का मिश्रित जल होता है।

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