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आवारा पशुओं के कारण मौतों को रोकने के लिए श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लिए कार्य योजना कब?

कोटा के लिए सरकार बना रही है यह योजना, अच्छी बात है मगर
 
श्रीगंगानगर। स्वायत्त शासन मंत्री शान्ति कुमार धारीवाल ने गुरूवार को विधानसभा में बताया कि कोटा में आवारा पशुओं के कारण हो रही मौतों को रोकने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाई जा रही है। इस खबर को जिसने भी सुना, उसे प्रसन्नता हुई है लेकिन बड़ा सवाल भी है कि आवारा पशुओं के कारण हो रही मौतों को रोकने के लिए श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लिए सरकार कार्य योजना कब बनाएगी?
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में आवारा पशुओं की समस्या बहुत गंभीर है। आवारा पशुओं के कारण दोनों जिलों के किसी न किसी गांव-कस्बे में हादसे होते ही रहते हैं। समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि कब किस दिशा से कोई आवारा पशु दौड़ता आए और किस दुपहिया सवार को अपनी चपेट में ले ले, कोई नहीं जानता।
आवारा पशुओं के टकराने के कारण तो हादसे हो ही रहे हैं, राह चलते लोगों को टक्कर मार देने से भी मौतें हो रही हैं। नोहर क्षेत्र के फेफाना गांव की गुरुवार की घटना एकदम ताजा है। गांव में एक भैंसे ने अस्सी वर्षीय मनीराम मेघवाल के टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। भैंसे की टक्कर से दो ग्रामीण घायल भी हुए हैं। इस तरह की घटनाएं दोनों जिलों में आए दिन की बात हो गई है।
श्रीगंगानगर शहर में आवारा पशुओं के कारण समय-समय पर हादसों में लोग अपनी जान से हाथ धोते रहे हैं। पिछले साल ऐसी ही एक घटना के बाद पशुओं को पकडऩे का अभियान भी चलाया गया लेकिन बाद में सब कुछ भुला दिया गया। शहर में आवारा पशुओं का आतंक पहले की तरह बरकरार हो गया है।
इन निरीह पशुओं को दोष नहीं दिया जा सकता। उनका कोई दोष है भी नहीं क्योंकि गांवों के लोग उन्हें शहरों में धकेल देते हैं और शहरों के लोग चाहते हैं ये पशु गांवों में चले जाएं। समस्या का कोई बड़ा हल राज्य सरकार को ही खोजना होगा।
स्वायत्त शासन मंत्री धारीवाल ने कोटा का मसला उठने पर विधानसभा में माना है कि यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए कोटा में बाहर से आने वाले पशुओं के मार्ग को चिन्हित कर नगर विकास न्यास द्वारा काउ कैचर लगाने तथा डेयरियों को भी शहर से दूर स्थानान्तरित करने की योजना बनाई जा रही है।
ऐसी ही कोई योजना के लिए श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए भी बने, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के विधायकों को इसके लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। कोटा स्वायत शासन मंत्री का क्षेत्र है। संभव है मंत्री के प्रभाव से वहां कोई ऐसी योजना का खाका खींचा जा रहा हो, जो दूरगामी साबित हो सकती हो। वैसी ही कोई योजना श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए भी बने, इसकी कोशिश तो की ही जानी चाहिए।

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