राजस्थान समेत आठ राज्य करेंगे वाहन रजिस्टे्रशन और परमिट की दरें एक समान
- चंडीगढ़ में हुई परिवहन सचिवों व आयुक्तों की बैठक में बनी सहमति
श्रीगंगानगर। पेट्रोल-डीजल और शराब पर समान टैक्स की कवायद में लगे उत्तरी भारत के राज्यों ने अब वाहनों के रजिस्ट्रेशन और परिवहन परमिट की दरें समान करने पर फोकस किया है। पांच राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ आठ राज्यों के परिवहन सचिव और आयुक्तों में सहमति बनी है कि कर चोरी रोकने के लिए सभी राज्यों में वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस सहित दूसरे तमाम कर एक समान होने चाहिएं। इसके अलावा रोड सेफ्टी के लिए मिलकर काम करने तथा सभी राज्यों में अंतरराज्यीय रूटों पर बसों के संचालन के लिए संयुक्त समझौते के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में हुई बैठक में मेजबान हरियाणा की ओर से परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के साथ उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पंजाब की रजिया सुल्तान, हिमाचल प्रदेश के गोविंद सिंह ठाकुर और दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने लंबी चर्चा की। इस दौरान उत्तराखंड, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ की नुमाइंदगी वहां के परिवहन सचिवों और परिवहन आयुक्तों ने की। अगली बैठक दिल्ली में बुलाई गई है जहां परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त प्रस्ताव को सिरे चढ़ाने की कोशिश करेंगे।
मैराथन बैठक के बाद साझा प्रेस कांफ्रेंस में हरियाणा के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि पूरे देश में एक समान कर प्रणाली जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने से राज्यों का राजस्व बढ़ा है। ऐसे में जरूरी है कि उत्तर भारत के सभी राज्य वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ ही अन्य सभी कर एक समान रखें ताकि टैक्स चोरी के फेर में वाहन मालिक वाहनों के पंजीकरण और परमिट के लिए पड़ोसी राज्यों की तरफ न भागें।
हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में वाहनों के रजिस्ट्रेशन टैक्स में भारी अंतर का हवाला देते हुए पंवार ने कहा कि टैक्स में एकरूपता के अभाव में लोग दूसरे राज्यों में जाकर वाहन खरीदते हैं जिससे स्थानीय सरकारों को घाटा होता है।
इसी तरह दिल्ली में यात्री कर शून्य है, जबकि दूसरे राज्यों में इस टैक्स की अलग-अलग दरें है। यही वजह है कि वाहन मालिक सार्वजनिक वाहनों के लिए दिल्ली से परमिट लेना पसंद करते हैं।
हरियाणा के परिवहन सचिव धनपत सिंह ने बताया कि पिछले साल 19 अप्रैल को गुवाहाटी में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में सभी राज्यों ने दस लाख की कीमत वाले वाहनों पर आठ फीसद, 20 लाख के वाहनों पर दस फीसद और इससे अधिक कीमत वाले वाहनों पर 12 फीसद टैक्स पर सहमति बनी थी। डीजल वाहनों पर दो फीसद टैक्स ज्यादा लेने और इलेक्ट्रिक वाहनों पर दो फीसद कम टैक्स लेने पर सहमति बनी। हालांकि अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में 25 फीसद तक छूट दी जाएगी।
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि चूंकि मध्यम वर्ग भी कार खरीदता है, इसलिए छह लाख से कम कीमत वाले वाहनों पर कम टैक्स लगे, जबकि छह से दस लाख तक कीमत वाले वाहनों पर आठ फीसद टैक्स लगाया जाए।
श्रीगंगानगर। पेट्रोल-डीजल और शराब पर समान टैक्स की कवायद में लगे उत्तरी भारत के राज्यों ने अब वाहनों के रजिस्ट्रेशन और परिवहन परमिट की दरें समान करने पर फोकस किया है। पांच राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ आठ राज्यों के परिवहन सचिव और आयुक्तों में सहमति बनी है कि कर चोरी रोकने के लिए सभी राज्यों में वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस सहित दूसरे तमाम कर एक समान होने चाहिएं। इसके अलावा रोड सेफ्टी के लिए मिलकर काम करने तथा सभी राज्यों में अंतरराज्यीय रूटों पर बसों के संचालन के लिए संयुक्त समझौते के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में हुई बैठक में मेजबान हरियाणा की ओर से परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के साथ उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पंजाब की रजिया सुल्तान, हिमाचल प्रदेश के गोविंद सिंह ठाकुर और दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने लंबी चर्चा की। इस दौरान उत्तराखंड, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ की नुमाइंदगी वहां के परिवहन सचिवों और परिवहन आयुक्तों ने की। अगली बैठक दिल्ली में बुलाई गई है जहां परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त प्रस्ताव को सिरे चढ़ाने की कोशिश करेंगे।
मैराथन बैठक के बाद साझा प्रेस कांफ्रेंस में हरियाणा के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि पूरे देश में एक समान कर प्रणाली जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने से राज्यों का राजस्व बढ़ा है। ऐसे में जरूरी है कि उत्तर भारत के सभी राज्य वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ ही अन्य सभी कर एक समान रखें ताकि टैक्स चोरी के फेर में वाहन मालिक वाहनों के पंजीकरण और परमिट के लिए पड़ोसी राज्यों की तरफ न भागें।
हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में वाहनों के रजिस्ट्रेशन टैक्स में भारी अंतर का हवाला देते हुए पंवार ने कहा कि टैक्स में एकरूपता के अभाव में लोग दूसरे राज्यों में जाकर वाहन खरीदते हैं जिससे स्थानीय सरकारों को घाटा होता है।
इसी तरह दिल्ली में यात्री कर शून्य है, जबकि दूसरे राज्यों में इस टैक्स की अलग-अलग दरें है। यही वजह है कि वाहन मालिक सार्वजनिक वाहनों के लिए दिल्ली से परमिट लेना पसंद करते हैं।
हरियाणा के परिवहन सचिव धनपत सिंह ने बताया कि पिछले साल 19 अप्रैल को गुवाहाटी में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में सभी राज्यों ने दस लाख की कीमत वाले वाहनों पर आठ फीसद, 20 लाख के वाहनों पर दस फीसद और इससे अधिक कीमत वाले वाहनों पर 12 फीसद टैक्स पर सहमति बनी थी। डीजल वाहनों पर दो फीसद टैक्स ज्यादा लेने और इलेक्ट्रिक वाहनों पर दो फीसद कम टैक्स लेने पर सहमति बनी। हालांकि अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में 25 फीसद तक छूट दी जाएगी।
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि चूंकि मध्यम वर्ग भी कार खरीदता है, इसलिए छह लाख से कम कीमत वाले वाहनों पर कम टैक्स लगे, जबकि छह से दस लाख तक कीमत वाले वाहनों पर आठ फीसद टैक्स लगाया जाए।

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