श्रेय की होड़ छोडि़ए पानी में पत्थर तैराते रहिए
- यह मसला 'रामसेतुÓ बनाने जैसा
- अगर हम लोग गाल बजाते रहे हो सकता है लक्ष्य से भटक जाएं
श्रीगंगानगर। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लुधियाना की प्रदूषण फैलाने वाली 44 डाइंग फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश क्या दिए, श्रीगंगानगर मेें इसका श्रेय लेने की होड़ लग गई है। सांसद से लेकर छुटभैये नेताओं तक सब इसे अपनी उपलब्धि बता कर अपने हाथों अपनी पीठ थपथपाने मेंं लग गए हैं। मीडिया का बर्ताव भी ऐसा ही है। मीडिया में भी अपने मुंह मियां मिठू बनने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है कि अभी सिर्फ आदेश जारी हुआ है, प्रदूषित पानी का 'रावणÓ मरा नहीं है। उसे मारने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश का क्रियान्वयन जरूरी है। अगर हम लोग यूं ही गाल बजाने में व्यस्त रहे हो सकता है लक्ष्य से भटक जाएं।
प्रदूषित पानी का यह मसला कोई ताजा-ताजा पैदा हुई समस्या नहीं है। कई दशकों से पंजाब का प्रदूषित पानी नहरों में बहकर हमारे यहां आ रहा है और हमें कई बीमारियों से ग्रस्त कर रहा है। राजनीतिक दलों और नेताओं ने इस मसले को चुनावी मुद्दा बनाने से ज्यादा कुछ नहीं किया है। अभी कुछ दिनों से इस मुद्दे पर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों मेें हो-हल्ला हो रहा है। यकीनन, विरोध के इन स्वरों की तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि अगर विरोध के यह स्वर फिजां में न गूंजते तो शायद नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की पालना में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह आदेश जारी नहीं करता।
इसमें कोई दो-राय नहीं कि 44 फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश हमारे क्षेत्र की जनता के संघर्ष की जीत का एक उदाहरण है। इसका 'क्रेडिटÓ कोई एक नेता या नेताओं का समूह कैसे ले सकता है? फिर श्रेय किस बात का? क्या प्रदूषित पानी का मसला हल हो गया है? क्या नहरों में प्रदूषित पानी आना बंद हो गया है? इन सवालों का जवाब है-नहीं।
यह मसला उतना छोटा नहीं है, जितना छुटभैये नेता समझ रहे हैं। जिन 44 फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है, उन फैक्ट्रियों के मालिकों के पास इस आदेश के खिलाफ अदालत में जाने का विकल्प अभी खुला है। निश्चित रूप से इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी। ऐसा होने पर हमें कानूनी लड़ाई भी लडऩी होगी।
पंजाब में और भी कई जगहें ऐसी हैं, जहां से हमारी नहरों मेें गंदा पानी डाला जा रहा है। हमें वे तमाम छेद बंद कराने होंगे। इसके लिए सतत निगरानी रखनी होगी। यह एक लंबी लड़ाई है, जिसे मिलकर लडऩा होगा।
मान लीजिए, गंदे पानी को बंद कराने का काम 'रामसेतुÓ बनाने जैसा है। हर किसी को पत्थर उठा-उठा कर पानी में तैराने होंगे। इस पुण्य कर्म में कोई छोटा नहीं, कोई बड़ा नहीं। रामसेतु की तामीर में तो एक गिलहरी ने भी हाथ बंटाया। कुछ ऐसा ही काम करना होगा। ऐसा होने पर ही लंका में घुसना और रावण को मारना संभव हो पाएगा।
- अगर हम लोग गाल बजाते रहे हो सकता है लक्ष्य से भटक जाएं
श्रीगंगानगर। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लुधियाना की प्रदूषण फैलाने वाली 44 डाइंग फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश क्या दिए, श्रीगंगानगर मेें इसका श्रेय लेने की होड़ लग गई है। सांसद से लेकर छुटभैये नेताओं तक सब इसे अपनी उपलब्धि बता कर अपने हाथों अपनी पीठ थपथपाने मेंं लग गए हैं। मीडिया का बर्ताव भी ऐसा ही है। मीडिया में भी अपने मुंह मियां मिठू बनने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है कि अभी सिर्फ आदेश जारी हुआ है, प्रदूषित पानी का 'रावणÓ मरा नहीं है। उसे मारने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश का क्रियान्वयन जरूरी है। अगर हम लोग यूं ही गाल बजाने में व्यस्त रहे हो सकता है लक्ष्य से भटक जाएं।
प्रदूषित पानी का यह मसला कोई ताजा-ताजा पैदा हुई समस्या नहीं है। कई दशकों से पंजाब का प्रदूषित पानी नहरों में बहकर हमारे यहां आ रहा है और हमें कई बीमारियों से ग्रस्त कर रहा है। राजनीतिक दलों और नेताओं ने इस मसले को चुनावी मुद्दा बनाने से ज्यादा कुछ नहीं किया है। अभी कुछ दिनों से इस मुद्दे पर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों मेें हो-हल्ला हो रहा है। यकीनन, विरोध के इन स्वरों की तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि अगर विरोध के यह स्वर फिजां में न गूंजते तो शायद नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की पालना में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह आदेश जारी नहीं करता।
इसमें कोई दो-राय नहीं कि 44 फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश हमारे क्षेत्र की जनता के संघर्ष की जीत का एक उदाहरण है। इसका 'क्रेडिटÓ कोई एक नेता या नेताओं का समूह कैसे ले सकता है? फिर श्रेय किस बात का? क्या प्रदूषित पानी का मसला हल हो गया है? क्या नहरों में प्रदूषित पानी आना बंद हो गया है? इन सवालों का जवाब है-नहीं।
यह मसला उतना छोटा नहीं है, जितना छुटभैये नेता समझ रहे हैं। जिन 44 फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है, उन फैक्ट्रियों के मालिकों के पास इस आदेश के खिलाफ अदालत में जाने का विकल्प अभी खुला है। निश्चित रूप से इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी। ऐसा होने पर हमें कानूनी लड़ाई भी लडऩी होगी।
पंजाब में और भी कई जगहें ऐसी हैं, जहां से हमारी नहरों मेें गंदा पानी डाला जा रहा है। हमें वे तमाम छेद बंद कराने होंगे। इसके लिए सतत निगरानी रखनी होगी। यह एक लंबी लड़ाई है, जिसे मिलकर लडऩा होगा।
मान लीजिए, गंदे पानी को बंद कराने का काम 'रामसेतुÓ बनाने जैसा है। हर किसी को पत्थर उठा-उठा कर पानी में तैराने होंगे। इस पुण्य कर्म में कोई छोटा नहीं, कोई बड़ा नहीं। रामसेतु की तामीर में तो एक गिलहरी ने भी हाथ बंटाया। कुछ ऐसा ही काम करना होगा। ऐसा होने पर ही लंका में घुसना और रावण को मारना संभव हो पाएगा।

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