सभापति कांग्रेस के, सरकार कांग्रेस की फिर भी आयुक्त को पत्र
- तत्कालीन आयुक्त सही नहीं था, वर्तमान से बनती नहीं
- शहर में सफाई व्यवस्था ठप, विकास कार्य रुके
श्रीगंगानगर। नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है और विकास कार्य रुके हुए हैं। खुद कांग्रेस के ही पार्षद जिला कलेक्टर को ज्ञापन देते हैं कि उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। उसे ठीक करवाया जाए।
नगरपरिषद सभापति आयुक्त को पत्र लिखते हैं कि शहर के स्थाई सफाई कर्मचारियों को सभी वार्डों में एक साथ विभाजित किया जाए। स्थिति समझ से परे है कि वर्तमान में राज्य में सरकार कांग्रेस की है। उसके बावजूद कार्य क्यों नहीं हो रहे।
सभापति कांग्रेस के होने के बावजूद आयुक्त को पत्र लिखकर नाराजगी जतानी पड़ रही है कि जिला कलेक्टर ने पूर्व में स्थाई सफाई कर्मचारियों को सभी वार्डों में एकसमान विभाजित करने के लिए निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभी तक इस सम्बंध में कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
सभापति ने आयुक्त से कहा है कि इस सम्बंध में उन्हें 24 घंटे में अवगत करवाएं। तत्कालीन आयुक्त से सभापति की पटरी नहीं बैठती थी और वर्तमान से भी उनकी खींचतान है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि नगरपरिषद में आखिर चल क्या रहा है? जब भाजपा की सरकार थी, तब सभापति बजट न मिलने का रोना रोते थे। अब जब सरकार कांग्रेस की है, तब भी वही स्थिति है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सब आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। शहर नरक में जा रहा है।
- शहर में सफाई व्यवस्था ठप, विकास कार्य रुके
श्रीगंगानगर। नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है और विकास कार्य रुके हुए हैं। खुद कांग्रेस के ही पार्षद जिला कलेक्टर को ज्ञापन देते हैं कि उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। उसे ठीक करवाया जाए।
नगरपरिषद सभापति आयुक्त को पत्र लिखते हैं कि शहर के स्थाई सफाई कर्मचारियों को सभी वार्डों में एक साथ विभाजित किया जाए। स्थिति समझ से परे है कि वर्तमान में राज्य में सरकार कांग्रेस की है। उसके बावजूद कार्य क्यों नहीं हो रहे।
सभापति कांग्रेस के होने के बावजूद आयुक्त को पत्र लिखकर नाराजगी जतानी पड़ रही है कि जिला कलेक्टर ने पूर्व में स्थाई सफाई कर्मचारियों को सभी वार्डों में एकसमान विभाजित करने के लिए निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभी तक इस सम्बंध में कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
सभापति ने आयुक्त से कहा है कि इस सम्बंध में उन्हें 24 घंटे में अवगत करवाएं। तत्कालीन आयुक्त से सभापति की पटरी नहीं बैठती थी और वर्तमान से भी उनकी खींचतान है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि नगरपरिषद में आखिर चल क्या रहा है? जब भाजपा की सरकार थी, तब सभापति बजट न मिलने का रोना रोते थे। अब जब सरकार कांग्रेस की है, तब भी वही स्थिति है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सब आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। शहर नरक में जा रहा है।

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