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ग्रामीण 'शहरीÓ बन पाएंगे या नहीं, परिषद पर निर्भर

- पुनर्सीमांकन से पहले दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव भिजवाने पर जोर
श्रीगंगानगर। नगर निकाय चुनाव से पहले नगरपरिषद क्षेत्र में वार्डों के पुनर्सीमांकन के लिए भले ही राज्य सरकार चार दिन पहले अधिसूचना जारी कर चुकी है और अधिकतर निकायों ने पुनर्सीमांकन का कार्य भी शुरू कर दिया है। इसके बावजूद निकाय चाहे, तो अपना दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवा सकती है। समय रहते भिजवाये गए प्रस्तावों पर राज्य सरकार सकारात्मक रुख अपनाते हुए उन्हें स्वीकार भी कर सकती है। शहर के लोगों और जनप्रतिनिधियों में भी इसे लेकर बेचैनी है। दोनों पक्षों का मानना है कि यदि शहरी क्षेत्र में विस्तार के बिना वार्डों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो इसका कोई लाभ आने वाले समय में नहीं मिलेगा।
नगर निकाय की जानकारी रखने वाले राजनीतिज्ञों की माने तो  नगरपरिषद को शहरी क्षेत्र का विस्तार कर नए वार्डों में पंचायत क्षेत्र में आने वाले इलाकों को शामिल करने के प्रस्ताव भेजना चाहिए। शहरी क्षेत्र में विकास होगा, तो संबंधित इलाकों में रहने वाले लोगों को भी अधिक सुविधाएं मिलेंगी। राजनीतिक स्तर पर भी इसका फायदा उठाया जा सकेगा। पंचायत क्षेत्र के मतदाता भी शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाएंगे। शहर की सरकार की ताकत बढ़ेगी।
विधायक राजकुमार गौड़ ने शहरी सीमा से सटते पंचायत क्षेत्र की कई कॉलोनियों को नगरपरिषद क्षेत्र में शामिल करने की मांग कर रखी है। उनका मानना है कि सरकार ने नगरपरिषद क्षेत्र में वार्डों की संख्या 50 से बढ़ाकर 65 करने की अधिसूचना जारी की है। इसका फायदा नगरपरिषद बोर्ड को उठाना चाहिए।
बोर्ड को  शहरी क्षेत्र विस्तार का प्रस्ताव बनाकर संबंधित कॉलोनियों को वार्डों में शामिल करने के प्रयास करने चाहिएं। प्रस्ताव सरकार के पास जायेगा, तो सकारात्मक निर्णय भी मिल सकता है। नगरपरिषद का दायरा बढऩे से जहां सुविधाओं में विस्तार होगा, वहीं पंचायत क्षेत्र के शहर में आने के बाद जनसंख्या भी बढ़ेगी। इसका फायदा आने वाले वर्षों में नगरपरिषद से नगर निगम बनने के रूप में मिलेगा।
उपसभापति जगदीश राय जांदू का कहना है कि करीब 10 साल पहले उनके कार्यकाल के दौरान भी शहरी क्षेत्र में विस्तार का प्रस्ताव भेजा गया था। नगरपरिषद चाहे तो अब भी ऐसा प्रस्ताव भेज सकती है। उनकी स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल से इस विषय पर चर्चा हुई थी, चर्चा के दौरान स्वायत शासन मंत्री ने नगरपरिषद की ओर से मिलने वाले प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय  का भरोसा दिलाया है। अब प्रस्ताव भेजना या नहीं भेजना नगरपरिषद बोर्ड तय करेगा।
सभापति अजय चांडक का नगरपरिषद क्षेत्र में विस्तार विषय पर कहना है कि सरकार शहर की वर्तमान सीमा में बिना परिवर्तन जनसंख्या के आधार पर करते हुए वार्डों की संख्या 50 से 65 करने की अधिसूचना जारी कर चुकी है। नगरपरिषद बोर्ड के प्रस्ताव की कोई बात नहीं है। पुनर्सीमांकन प्रशासन व सरकार का काम है। इसमें नगरपरिषद बोर्ड दखल नहीं देगा।


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