अब गन्ने की मिठास के आधार पर किसानों को मिलेगा मूल्य!
- शुगर मिल प्रशासन करवाएगा सर्वे
श्रीगंगानगर। अब गन्ने की मिठास के आधार पर किसानों को उसका मूल्य मिलेगा। यदि गन्ने में मिठास अधिक है तो सरकार द्वारा निर्धारित दरों से भी ज्यादा गन्ने का मूल्य गन्ना उत्पादक किसानों को मिलेगा। कई राज्यों में इस तरह की प्रक्रिया चल रही है। उसी को देखते हुए सरकार ने यह योजना बनाई है।
हालांकि यह योजना कितनी कारगर साबित होगी, अभी कहना जल्दबाजी होगा। पिछले दिनों जयपुर में आयोजित बैठक में गन्ना विकास अधिकारियों ने यह सुझाव दिया था कि यदि रिकवरी बढ़ानी है तो गन्ने की मिठास के आधार पर मूल्य तय हो, तभी रिकवरी बढ़ेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने यह भी बताया कि आमतौर पर यह देखा गया है कि गन्ने की फसल में किसान निर्धारित मात्रा में पानी का उपयोग नहीं करता। वह गन्ने को पानी कम लगाकर अन्य फसलों में भी लगा लेता है।
इसके अलावा गन्ने की फसल भी अलग-अलग खेतों में अलग-अलग होती है। कईयों में मिठास बहुत कम होती है, कईयों में बहुत अधिक। ऐसे में अधिक मिठास वाले गन्ना उत्पादक किसानों को कम मिठास के गन्ने के बराबर ही मूल्य मिलता है। यदि मिठास के आधार पर गन्ने का मूल्य तय होने लग जाए तो सभी किसान इसमें रूचि लेंगे और गन्ने को निर्धारित मात्रा में पानी लगाया जाएगा और उसमें खाद व अन्य दवाएं सिफारिशानुसार निर्धारित समय पर किसान देगा।
शुगर मिल प्रशासन ने सुझाव के आधार पर सर्वे करवाने की योजना बनाई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्षेत्र में किन-किन खेतों में मिठास को लेकर क्या स्थिति है?
कुछ राज्यों में गन्ने की कटाई फैक्ट्री संचालकों द्वारा करवाई जाती है। ऐसा श्रीगंगानगर जिले में संभव नहीं है। इसके अलावा एक गन्ने से भरी ट्रॉली का सैम्पल लेकर उसमें मिठास की जांच करना काफी मुश्किल काम माना जा रहा है। इस जांच में करीब चार घ्ंाटे का समय लगता है। ऐसे में उच्चाधिकारियों की इस मामले में राय ली जा रही है ताकि इस योजना को पूरी तरह से लागू किया जा सके और किसान को भी गन्ने की क्वालिटी के अनुसार उसका मूल्य मिल सके। क्षेत्र में इस बार करीब 18 लाख क्विंटल से भी अधिक गन्ने का उत्पादन हुआ था। लगातार गन्ने की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। किसानों का गन्ना उत्पादन को लेकर काफी रूझान भी है।
श्रीगंगानगर। अब गन्ने की मिठास के आधार पर किसानों को उसका मूल्य मिलेगा। यदि गन्ने में मिठास अधिक है तो सरकार द्वारा निर्धारित दरों से भी ज्यादा गन्ने का मूल्य गन्ना उत्पादक किसानों को मिलेगा। कई राज्यों में इस तरह की प्रक्रिया चल रही है। उसी को देखते हुए सरकार ने यह योजना बनाई है।
हालांकि यह योजना कितनी कारगर साबित होगी, अभी कहना जल्दबाजी होगा। पिछले दिनों जयपुर में आयोजित बैठक में गन्ना विकास अधिकारियों ने यह सुझाव दिया था कि यदि रिकवरी बढ़ानी है तो गन्ने की मिठास के आधार पर मूल्य तय हो, तभी रिकवरी बढ़ेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने यह भी बताया कि आमतौर पर यह देखा गया है कि गन्ने की फसल में किसान निर्धारित मात्रा में पानी का उपयोग नहीं करता। वह गन्ने को पानी कम लगाकर अन्य फसलों में भी लगा लेता है।
इसके अलावा गन्ने की फसल भी अलग-अलग खेतों में अलग-अलग होती है। कईयों में मिठास बहुत कम होती है, कईयों में बहुत अधिक। ऐसे में अधिक मिठास वाले गन्ना उत्पादक किसानों को कम मिठास के गन्ने के बराबर ही मूल्य मिलता है। यदि मिठास के आधार पर गन्ने का मूल्य तय होने लग जाए तो सभी किसान इसमें रूचि लेंगे और गन्ने को निर्धारित मात्रा में पानी लगाया जाएगा और उसमें खाद व अन्य दवाएं सिफारिशानुसार निर्धारित समय पर किसान देगा।
शुगर मिल प्रशासन ने सुझाव के आधार पर सर्वे करवाने की योजना बनाई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्षेत्र में किन-किन खेतों में मिठास को लेकर क्या स्थिति है?
कुछ राज्यों में गन्ने की कटाई फैक्ट्री संचालकों द्वारा करवाई जाती है। ऐसा श्रीगंगानगर जिले में संभव नहीं है। इसके अलावा एक गन्ने से भरी ट्रॉली का सैम्पल लेकर उसमें मिठास की जांच करना काफी मुश्किल काम माना जा रहा है। इस जांच में करीब चार घ्ंाटे का समय लगता है। ऐसे में उच्चाधिकारियों की इस मामले में राय ली जा रही है ताकि इस योजना को पूरी तरह से लागू किया जा सके और किसान को भी गन्ने की क्वालिटी के अनुसार उसका मूल्य मिल सके। क्षेत्र में इस बार करीब 18 लाख क्विंटल से भी अधिक गन्ने का उत्पादन हुआ था। लगातार गन्ने की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। किसानों का गन्ना उत्पादन को लेकर काफी रूझान भी है।

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