रातों-रात कमरे का निर्माण करवाया, और हो गया जमीन पर कब्जा!
- जस्सा सिंह मार्ग पर बेशकीमती से जुड़ा मामला
श्रीगंगानगर। जस्सा सिंह मार्ग पर स्थित एक बेशकीमती जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। कब्जाधारियों ने रातों-रात इस जमीन पर कमरे का निर्माण करवाया और खुद का गेट लगाते हुए एक बोर्ड भी टांग दिया। जमीन मालिक ने कोतवाली पुलिस थाना में एक दर्जन से अधिक लोगों पर धोखाधड़ी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया है।
पुलिस के अनुसार बृजलाल पुत्र लच्छीराम अग्रवाल निवासी 3 बी-14 मीरा मार्ग जवाहरनगर की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश निवासी अमरनाथ के पुत्र-पुत्रियों उपरेन्द्र नाथ, मनोज कुमार, रीता रानी व चित्रलेखा, श्रीगंगानगर निवासी अमित सिंगल, अमिताभ खैरवा, श्याम कालड़ा, राजदीप सिंह, हेमंत कुमार, आशीष गुप्ता, विनोद ताखर, सुरेन्द्रपाल सिंह सरपंच, दिपेश बिश्रोई पटवारी व एक अन्य के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 447, 120 बी, 147, 149 में मुकदमा दर्ज किया गया है।
परिवादी बृजलाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार की चक 3 ए छोटी मुरब्बा नम्बर 7, 11 व 20 में कृषि भूमि है। उसके पिता लच्छीराम गिदड़ा ने उक्त भूमि में से मुरब्बा नम्बर 7 उसके नाम से बंटवारानामा कर दी और मुरब्बा नम्बर 11 की 3 बीघा 1 बिस्वा भूमि अपने पुत्र मुरली मनोहर जरिए बंटवारारामा कर दी। मुरब्बा नम्बर 11 की शेष 16 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता लच्छीराम की थी। पिता ने अपनी भूमि पोती पुष्पा देवी पत्नी प्रकाशचंद्र जैन को वसीयत कर दी। इसी जमीन के पास मुरब्बा नम्बर 20 में 24 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता ने अमरनाथ को गिफ्ट कर दी। अमरनाथ के निधन के बाद इस भूमि का इंतकाल उसके वारिसान उपेन्द्रनाथ, मनोज, पुत्रियां रीता व चित्रलेखा के नाम से हुआ। उसके पिता लच्छीराम का देहांत 14 अगस्त 2002 को हुआ। उसके पिता लच्छीराम द्वारा मुरब्बा नम्बर 7 व 11 की भूमि के संबंध में की गई बंद वसीयत 31 मार्च 1998 को 30 अगस्त 2002 को खुलवाया गया। अमरनाथ के वारिसानों ने अपनी जमीन को अन्य आरोपियों को बेच दिया। इस जमीन पर कब्जा करने के लिए आरोपियों ने उसकी बेशकीमती जमीन पर थी कब्जा कर लिया। उसकी जमीन मुरब्बा नम्बर 11 जस्सा सिंह मार्ग के साथ है, जबकि अमरनाथ के हिस्से की जमीन पीछे के मुरब्बे में है। आरोपियों ने उसकी जमीन पर 26 मई को उसके नौकरों को मारपीट करके जमीन से भगा दिया। मुरब्बा नम्बर 11 की तारबंदी कर दी। खेत कर्मचारी पृथ्वीराज व ओमप्रकाश मौके से भाग गये। आरोपियों ने उसकी कब्जाशुदा जमीन पर अस्थाई कमरे का निर्माण कर लिया और दस्तावेज छुपाते हुए इंतकाल करवा लिया।
श्रीगंगानगर। जस्सा सिंह मार्ग पर स्थित एक बेशकीमती जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। कब्जाधारियों ने रातों-रात इस जमीन पर कमरे का निर्माण करवाया और खुद का गेट लगाते हुए एक बोर्ड भी टांग दिया। जमीन मालिक ने कोतवाली पुलिस थाना में एक दर्जन से अधिक लोगों पर धोखाधड़ी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया है।
पुलिस के अनुसार बृजलाल पुत्र लच्छीराम अग्रवाल निवासी 3 बी-14 मीरा मार्ग जवाहरनगर की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश निवासी अमरनाथ के पुत्र-पुत्रियों उपरेन्द्र नाथ, मनोज कुमार, रीता रानी व चित्रलेखा, श्रीगंगानगर निवासी अमित सिंगल, अमिताभ खैरवा, श्याम कालड़ा, राजदीप सिंह, हेमंत कुमार, आशीष गुप्ता, विनोद ताखर, सुरेन्द्रपाल सिंह सरपंच, दिपेश बिश्रोई पटवारी व एक अन्य के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 447, 120 बी, 147, 149 में मुकदमा दर्ज किया गया है।
परिवादी बृजलाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार की चक 3 ए छोटी मुरब्बा नम्बर 7, 11 व 20 में कृषि भूमि है। उसके पिता लच्छीराम गिदड़ा ने उक्त भूमि में से मुरब्बा नम्बर 7 उसके नाम से बंटवारानामा कर दी और मुरब्बा नम्बर 11 की 3 बीघा 1 बिस्वा भूमि अपने पुत्र मुरली मनोहर जरिए बंटवारारामा कर दी। मुरब्बा नम्बर 11 की शेष 16 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता लच्छीराम की थी। पिता ने अपनी भूमि पोती पुष्पा देवी पत्नी प्रकाशचंद्र जैन को वसीयत कर दी। इसी जमीन के पास मुरब्बा नम्बर 20 में 24 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता ने अमरनाथ को गिफ्ट कर दी। अमरनाथ के निधन के बाद इस भूमि का इंतकाल उसके वारिसान उपेन्द्रनाथ, मनोज, पुत्रियां रीता व चित्रलेखा के नाम से हुआ। उसके पिता लच्छीराम का देहांत 14 अगस्त 2002 को हुआ। उसके पिता लच्छीराम द्वारा मुरब्बा नम्बर 7 व 11 की भूमि के संबंध में की गई बंद वसीयत 31 मार्च 1998 को 30 अगस्त 2002 को खुलवाया गया। अमरनाथ के वारिसानों ने अपनी जमीन को अन्य आरोपियों को बेच दिया। इस जमीन पर कब्जा करने के लिए आरोपियों ने उसकी बेशकीमती जमीन पर थी कब्जा कर लिया। उसकी जमीन मुरब्बा नम्बर 11 जस्सा सिंह मार्ग के साथ है, जबकि अमरनाथ के हिस्से की जमीन पीछे के मुरब्बे में है। आरोपियों ने उसकी जमीन पर 26 मई को उसके नौकरों को मारपीट करके जमीन से भगा दिया। मुरब्बा नम्बर 11 की तारबंदी कर दी। खेत कर्मचारी पृथ्वीराज व ओमप्रकाश मौके से भाग गये। आरोपियों ने उसकी कब्जाशुदा जमीन पर अस्थाई कमरे का निर्माण कर लिया और दस्तावेज छुपाते हुए इंतकाल करवा लिया।

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