कलक्टर साब! ध्यान दीजिए, डीजे वालों से श्रीगंगानगर के लोग परेशान हैं
- आम जनता का एक खत श्रीगंगानगर के जिला कलक्टर के नाम
आदरणीय कलक्टर साब। सादर नमस्कार। एक खबर पढ़कर बहुत खुशी हुई है। यह खबर राज्य के भीलवाड़ा से आई है। इस खबर के मुताबिक भीलवाड़ा के जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ने जिले में लोगों को ध्वनि प्रदूषण से होने वाली परेशानी से राहत दिलाने के लिए सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थानों पर डीजे बजाने पर पाबंदी लगा दी है।
भीलवाड़ा कलक्टर ने आदेश जारी किया है कि राजस्थान ध्वनि नियंत्रण अधिनियम के तहत आदेशों की पालना कड़ाई से सुनिश्चित की जाएगी। इसका उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध होगा। अब कोई भी व्यक्ति या उनका समूह या प्रतिनिधि किसी भी प्रकार के धार्मिक एवं अन्य समारोह के लिए तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्र (डीजे) का उपयोग नहीं कर सकेगा।
भीलवाड़ा के जिला कलक्टर का यह आदेश आमजन को निश्चित रूप से राहत पहुंचाने वाला है। इससे एक ओर वहां के लोगों के कानों को सुकून मिलेगा, वहीं वे लोग अब चैन की नींद सो सकेंगे। डीजे के कानफाड़ू शोर की वजह से जीना किस कदर दुश्वार हो जाता है, इस बात को श्रीगंगानगर शहर और जिले के लोग बहुत अच्छे से जानते हैं। समूचे जिले के लोगों को डीजे के शोर ने परेशान कर रखा है।
विवाह शादी हो या जागरण, निजी कार्यक्रम हो या सार्वजनिक, हर जगह डीजे का शोर गंूजता सुनाई देता है। डीजे का शोर इतना है कि आप इसे किसी डेसीबल की सीमा में नहीं बांध सकते। डीजे का शोर डेसीबल की तमाम सीमाओं को पार कर गया है। डीजे वाले जहां से गुजरते हैं, वहां तो लोगों के कान फटते ही हैं, लेकिन कल्पना कीजिए उन लोगों की, जिनके मकान मैरिज पैलेस के नजदीक हैं। ऐसे लोगों का तो दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो चुकी है। दिन-रात शोर को झेल रहे यह लोग अनिद्रा, तनाव, सिरदर्द जैसी व्याधियों को झेलने पर मजबूर हैं।
वैसे तो किसी भी ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग रात दस बजे के बाद नहीं किया जा सकता। राजस्थान हाई कोर्ट ने बरसों पहले इस तरह के आदेश जारी कर रखे हैं लेकिन हमारे यहां तो किसी को राजस्थान हाई कोर्ट के आदेशों की भी परवाह नहीं है। किसी मैरिज पैलेस को देख लें या फिर रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम, वहां कानफाड़ू डीजे आधी रात के बाद बजता रहता है। वह भी तब, जब रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की मंजूरी प्रशासन देता है लेकिन यह देखने की जहमत कभी कोई अधिकारी नहीं उठाता कि जिन शर्तों-नियमों के तहत कार्यक्रम की मंजूरी दी गई है, उनकी पालना भी हो रही है या नहीं?
महोदय, डीजे की समस्या एक बड़ी समस्या है। केवल हमारा जिला मुख्यालय ही नहीं, जिले के छोटे-छोटे गांव-कस्बे इस समस्या के शिकार हो रहे हैं। भीलवाड़ा के जिला कलक्टर महोदय ने एक आदेश जारी कर अपने जिले के लोगों को इस परेशानी से मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। वैसे ही आदेश की दरकार श्रीगंगानगर में भी है। आम जनता आपकी तरफ आशा से देख रही है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आप इस समस्या को गंभीरता पूर्वक लेते हुए लोगों को राहत दिलाएंगे।
आदरणीय कलक्टर साब। सादर नमस्कार। एक खबर पढ़कर बहुत खुशी हुई है। यह खबर राज्य के भीलवाड़ा से आई है। इस खबर के मुताबिक भीलवाड़ा के जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ने जिले में लोगों को ध्वनि प्रदूषण से होने वाली परेशानी से राहत दिलाने के लिए सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थानों पर डीजे बजाने पर पाबंदी लगा दी है।
भीलवाड़ा कलक्टर ने आदेश जारी किया है कि राजस्थान ध्वनि नियंत्रण अधिनियम के तहत आदेशों की पालना कड़ाई से सुनिश्चित की जाएगी। इसका उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध होगा। अब कोई भी व्यक्ति या उनका समूह या प्रतिनिधि किसी भी प्रकार के धार्मिक एवं अन्य समारोह के लिए तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्र (डीजे) का उपयोग नहीं कर सकेगा।
भीलवाड़ा के जिला कलक्टर का यह आदेश आमजन को निश्चित रूप से राहत पहुंचाने वाला है। इससे एक ओर वहां के लोगों के कानों को सुकून मिलेगा, वहीं वे लोग अब चैन की नींद सो सकेंगे। डीजे के कानफाड़ू शोर की वजह से जीना किस कदर दुश्वार हो जाता है, इस बात को श्रीगंगानगर शहर और जिले के लोग बहुत अच्छे से जानते हैं। समूचे जिले के लोगों को डीजे के शोर ने परेशान कर रखा है।
विवाह शादी हो या जागरण, निजी कार्यक्रम हो या सार्वजनिक, हर जगह डीजे का शोर गंूजता सुनाई देता है। डीजे का शोर इतना है कि आप इसे किसी डेसीबल की सीमा में नहीं बांध सकते। डीजे का शोर डेसीबल की तमाम सीमाओं को पार कर गया है। डीजे वाले जहां से गुजरते हैं, वहां तो लोगों के कान फटते ही हैं, लेकिन कल्पना कीजिए उन लोगों की, जिनके मकान मैरिज पैलेस के नजदीक हैं। ऐसे लोगों का तो दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो चुकी है। दिन-रात शोर को झेल रहे यह लोग अनिद्रा, तनाव, सिरदर्द जैसी व्याधियों को झेलने पर मजबूर हैं।
वैसे तो किसी भी ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग रात दस बजे के बाद नहीं किया जा सकता। राजस्थान हाई कोर्ट ने बरसों पहले इस तरह के आदेश जारी कर रखे हैं लेकिन हमारे यहां तो किसी को राजस्थान हाई कोर्ट के आदेशों की भी परवाह नहीं है। किसी मैरिज पैलेस को देख लें या फिर रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम, वहां कानफाड़ू डीजे आधी रात के बाद बजता रहता है। वह भी तब, जब रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की मंजूरी प्रशासन देता है लेकिन यह देखने की जहमत कभी कोई अधिकारी नहीं उठाता कि जिन शर्तों-नियमों के तहत कार्यक्रम की मंजूरी दी गई है, उनकी पालना भी हो रही है या नहीं?
महोदय, डीजे की समस्या एक बड़ी समस्या है। केवल हमारा जिला मुख्यालय ही नहीं, जिले के छोटे-छोटे गांव-कस्बे इस समस्या के शिकार हो रहे हैं। भीलवाड़ा के जिला कलक्टर महोदय ने एक आदेश जारी कर अपने जिले के लोगों को इस परेशानी से मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। वैसे ही आदेश की दरकार श्रीगंगानगर में भी है। आम जनता आपकी तरफ आशा से देख रही है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आप इस समस्या को गंभीरता पूर्वक लेते हुए लोगों को राहत दिलाएंगे।

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