गहराता जा रहा पेयजल संकट, 236 में से 190 ब्लॉक डार्कज़ोन पर, हैंडपंप-कुएं सूखे
- श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में ही स्थिति ठीक, शेष राजस्थान में हालात विकट
जयपुर। राजस्थान में लगभग सभी शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा रहा है। बांध, तालाब और कुएं सूखने के कारण लोगों को दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य में 236 ब्लॉक में से 190 डॉर्कजोन में आ गए हैं जहां हैंड पम्प और कुएं कुछ समय बाद ही सूख जाते हैं।
इधर, भीषण गर्मी के बीच राज्य सरकार की जलापूर्ति व्यवस्था भी लडखड़़ा गई है। कई स्थानों पर 10-10 दिन में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। बांधों की स्थिति भी काफी नाजुक हो गई है तथा 284 में से 215 बांध सूखने के कगार पर हैं। इनमें जयपुर, अजमेर और टोंक की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में करीब एक महीने का पानी बचा है। इसके अलावा पार्वती बांध में 16 प्रतिशत, गुढ़ा बांध में 11 प्रतिशत, जवाई बांध में 14 प्रतिशत तथा राजसमंद में 18 प्रतिशत पानी ही बचा है।
राज्य सरकार की पेयजल परियोजनायें भी धीमी गति से चल रही हैं तथा 54 में से 37 बड़ी परियोजनायें तथा 437 में 119 ग्रामीण परियोजनायें पूरी नहीं हो पाई हैं, इससे कई शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा रहा है। इसके अलावा कोटा, भरतपुर और नागौर में फ्लोराइडयुक्त पानी की काफी समस्या है।
बढ़ती गर्मी के कारण पानी की खपत काफी बढ़ गई है, लेकिन लोग अपने वाहन को साफ करने में कई लीटर पानी जाया कर देते हैं। कई स्थानों पर पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन टूटने से काफी पानी बह जाता है। जलदाय विभाग द्वारा खुदाये गये कुएं तीन साल से ज्यादा नहीं चल पाते तथा हैंड पम्प भी औसतन आठ महीने में ही सूख जाते हैं। कई गांवों के आसपास बने छोटे तालाब भी अब सूखने के कगार पर हैं तथा लोग इनसे भी गंदा पानी निकालने के लिये मजबूर हैं। जबकि यह माना जाता है कि 80 प्रतिशत बीमारियां दूषित पानी की वजह से होती हैं।
पिछली भाजपा शासन में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया गया था, जिससे कई जलाशयों में पानी आया तथा लोगों को राहत मिली, लेकिन भीषण गर्मी के कारण उनमें भी पानी ज्यादा नहीं टिक पाया। राज्य सरकार प्रति व्यक्ति 275 लीटर पानी बचाने के अभियान में लगी है, लेकिन कुछ संस्थाओं के अलावा इससे लोग नहीं जुड़ पा रहे हैं। अब भी व्यर्थ पानी बहाने का उन्हें कोई मलाल नहीं है।
राज्य सरकार सहित राज्य की जनता को जल्दी ही मानसून आने की आस है, इसीसे ही पेयजल संकट का हल निकल सकता है। राज्य में इंदिरा गांधी नहर परियोजना और गंगनहर से जुड़े क्षेत्रों में फिलहाल पेयजल का कोई संकट नहीं है तथा सिंचाई के लिये भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने मार्च महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिलों को नि:शुल्क करने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस निर्णय को प्रभावी तरीके से लागू कर आमजन को लाभ देने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस बारे में जो शिकायतें मिल रही हैं, उन्हें तुरन्त दुरस्त करें और आमजन को तथ्यात्मक स्पष्टीकरण भी जारी करें।
वर्तमान में राज्यभर में कुल 4500 गांवों और 47 शहरों में आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से पेयजल का परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टर्स को आकस्मिक निधि के लिए पर्याप्त अग्रिम राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे, ताकि पानी की कमी की शिकायत मिलने पर तुरंत टैकर भिजवाये जा सकें।
गांव-ढाणियों में स्थापित कुल 5200 डी-फ्लोरिडेशन में से 3950 चालू स्थिति में हैं। जलदाय विभाग का कहना है कि गत 5 माह में 7 शहरों की कई कॉलोनियों और कुल 2500 गांव-ढाणियों को पेयजल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा गया है। जयपुर शहर में बीसलपुर से पानी की उपलब्धता में कमी के पर्याप्त पेयजल के लिए 732 नलकूप स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 410 नलकूप चालू कर कर दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से जोधपुर-बाड़मेर-पाली के लिए राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना के तहत एशियाई विकास बैंक की मदद से 1454 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली प्रस्तावित पेयजल परियोजना को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। एएफडी योजना के तहत 287.38 करोड़ रुपये लागत वाले जोधपुर पुर्नगठन परियोजना के तीसरे चरण, ईसरदा बांध से दौसा और सवाई माधोपुर के लिए पेयजल वितरण योजना तथा बीकानेर शहर पुर्नगठन योजना को सैद्धान्तिक स्वीकृति दी गई।
जयपुर। राजस्थान में लगभग सभी शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा रहा है। बांध, तालाब और कुएं सूखने के कारण लोगों को दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य में 236 ब्लॉक में से 190 डॉर्कजोन में आ गए हैं जहां हैंड पम्प और कुएं कुछ समय बाद ही सूख जाते हैं।
इधर, भीषण गर्मी के बीच राज्य सरकार की जलापूर्ति व्यवस्था भी लडखड़़ा गई है। कई स्थानों पर 10-10 दिन में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। बांधों की स्थिति भी काफी नाजुक हो गई है तथा 284 में से 215 बांध सूखने के कगार पर हैं। इनमें जयपुर, अजमेर और टोंक की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में करीब एक महीने का पानी बचा है। इसके अलावा पार्वती बांध में 16 प्रतिशत, गुढ़ा बांध में 11 प्रतिशत, जवाई बांध में 14 प्रतिशत तथा राजसमंद में 18 प्रतिशत पानी ही बचा है।
राज्य सरकार की पेयजल परियोजनायें भी धीमी गति से चल रही हैं तथा 54 में से 37 बड़ी परियोजनायें तथा 437 में 119 ग्रामीण परियोजनायें पूरी नहीं हो पाई हैं, इससे कई शहर और गांवों में पेयजल संकट गहरा रहा है। इसके अलावा कोटा, भरतपुर और नागौर में फ्लोराइडयुक्त पानी की काफी समस्या है।
बढ़ती गर्मी के कारण पानी की खपत काफी बढ़ गई है, लेकिन लोग अपने वाहन को साफ करने में कई लीटर पानी जाया कर देते हैं। कई स्थानों पर पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन टूटने से काफी पानी बह जाता है। जलदाय विभाग द्वारा खुदाये गये कुएं तीन साल से ज्यादा नहीं चल पाते तथा हैंड पम्प भी औसतन आठ महीने में ही सूख जाते हैं। कई गांवों के आसपास बने छोटे तालाब भी अब सूखने के कगार पर हैं तथा लोग इनसे भी गंदा पानी निकालने के लिये मजबूर हैं। जबकि यह माना जाता है कि 80 प्रतिशत बीमारियां दूषित पानी की वजह से होती हैं।
पिछली भाजपा शासन में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया गया था, जिससे कई जलाशयों में पानी आया तथा लोगों को राहत मिली, लेकिन भीषण गर्मी के कारण उनमें भी पानी ज्यादा नहीं टिक पाया। राज्य सरकार प्रति व्यक्ति 275 लीटर पानी बचाने के अभियान में लगी है, लेकिन कुछ संस्थाओं के अलावा इससे लोग नहीं जुड़ पा रहे हैं। अब भी व्यर्थ पानी बहाने का उन्हें कोई मलाल नहीं है।
राज्य सरकार सहित राज्य की जनता को जल्दी ही मानसून आने की आस है, इसीसे ही पेयजल संकट का हल निकल सकता है। राज्य में इंदिरा गांधी नहर परियोजना और गंगनहर से जुड़े क्षेत्रों में फिलहाल पेयजल का कोई संकट नहीं है तथा सिंचाई के लिये भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने मार्च महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिलों को नि:शुल्क करने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस निर्णय को प्रभावी तरीके से लागू कर आमजन को लाभ देने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस बारे में जो शिकायतें मिल रही हैं, उन्हें तुरन्त दुरस्त करें और आमजन को तथ्यात्मक स्पष्टीकरण भी जारी करें।
वर्तमान में राज्यभर में कुल 4500 गांवों और 47 शहरों में आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से पेयजल का परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टर्स को आकस्मिक निधि के लिए पर्याप्त अग्रिम राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे, ताकि पानी की कमी की शिकायत मिलने पर तुरंत टैकर भिजवाये जा सकें।
गांव-ढाणियों में स्थापित कुल 5200 डी-फ्लोरिडेशन में से 3950 चालू स्थिति में हैं। जलदाय विभाग का कहना है कि गत 5 माह में 7 शहरों की कई कॉलोनियों और कुल 2500 गांव-ढाणियों को पेयजल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा गया है। जयपुर शहर में बीसलपुर से पानी की उपलब्धता में कमी के पर्याप्त पेयजल के लिए 732 नलकूप स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 410 नलकूप चालू कर कर दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से जोधपुर-बाड़मेर-पाली के लिए राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना के तहत एशियाई विकास बैंक की मदद से 1454 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली प्रस्तावित पेयजल परियोजना को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। एएफडी योजना के तहत 287.38 करोड़ रुपये लागत वाले जोधपुर पुर्नगठन परियोजना के तीसरे चरण, ईसरदा बांध से दौसा और सवाई माधोपुर के लिए पेयजल वितरण योजना तथा बीकानेर शहर पुर्नगठन योजना को सैद्धान्तिक स्वीकृति दी गई।

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