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लोकसभा में सबसे आगे बैठेंगे ये सांसद

- इस बार नहीं दिखाई देंगे ये पांच पुराने दिग्गज
नई दिल्ली। लोकसभा की पहली पंक्ति में इस बार काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। पांच लोकसभा सांसद जो पहली पंक्ति में बैठा करते थे इस बार वह नजर नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने इस बार चुनाव नहीं लड़ा है या फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। वहीं पहली पंक्ति में एनडीए की सीटें औसत रूप से बढ़ी हैं। पहली पंक्ति की सीटें लोकसभा स्पीकर के नजदीक होती हैं। कांग्रेस का कोटा दूसरे नंबर पर है क्योंकि उसे केवल 52 सीटों पर जीत हासिल हुई है।
यह संख्या पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले केवल आठ ज्यादा है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने केवल 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुल खडग़े और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी उन नेताओं में से एक हैं जो 17वीं लोकसभा के दौरान पहली पंक्ति पर बैठे हुए नहीं दिखाई देंगे। इसके अलावा एआईएडीएमके के नेता एम थंबीदुराई भी पहली पंक्ति से नदारद रहेंगे। देवगौड़ा और थंबीदुराई जहां चुनाव में हार गए हैं। वहीं सुषमा स्वराज ने चुनाव नहीं लड़ा। गांधीनगर से सात बार चुने गए सांसद लाल कृष्ण आडवाणी को भाजपा ने लोकसभा टिकट नहीं दिया। लोकसभा के एक अधिकारी ने कहा, 'पहली पंक्ति की सीटें अमूमन वरिष्ठ सांसदों और विभिन्न पार्टियों के नेता प्रतिपक्ष को आवंटित की जाती हैं। यदि वह दोबारा चुने जाते हैं तो शिष्टाचार के नाते पूर्व प्रधानमंत्रियों को पहली पंक्ति की सीट दी जाती है। इसके अलावा पहली पंक्ति का कोटा पार्टी की मजबूती पर निर्भर करता है।Ó
इसके अलावा लोकसभा में इस बार दो और बदलाव दिखाई देंगे। इसकी वजह है बीजू जनता दल (बीजद) के नेता भातृहरि महताब और तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय को भी अपनी पसंदीदा सीट से हाथ धोना पड़ सकता है। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजद को 34 और तृणमूल के 20 सांसद चुने गए थे। वहीं इस बार दोनों की संख्या घटकर 22 और 10 रह गई है। जिसके कारण उनका कोटा 0.8 और 0.4 सीट हो गया है।


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