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निहालचंद 'अभिनंदन की राजनीतिÓ के जरिए जुटे टिकट के जुगाड़ मेंं

- कई सांसदों के टिकट काटे जाने की आशंका में बीजेपी में चढ़ा सियासी पारा
श्रीगंगानगर। भाजपा में अभी तक मिले फीडबैक और समीकरणों की समीक्षा के दौरान यह चर्चा जोरों पर है कि इस बार कई सांसदों के टिकट काटे जा सकते हैं। इसके संकेत मिलने के साथ ही पार्टी के भीतर सियासी पारा चढऩे लगा है। टिकट कटने के अंदेशे से परेशान मौजूदा सांसद निहालचंद मेघवाल ने 'अभिनंदन की राजनीतिÓ के जरिए टिकट के जुगाड़ की कोशिशें तेज कर दी हैं।
टिकट को लेकर निहालचंद पहले किसी भी चुनाव में इतने परेशान नहीं हुए, जितना उन्हें अब होना पड़ रहा है। इसकी वजह एक ओर अदालत में उनके खिलाफ रेप केस का होना है तो दूसरी ओर बीजेपी के कई नेता उनके खिलाफ माहौल बना कर टिकट हासिल करने के लिए जोर लगा रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीजेपी में नेताओं ने निहालचंद के मुकाबले में टिकट मांगी है।
इस बार भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष ओपी महेन्द्रा, बीजेपी के प्रदेश मंत्री निहालचंद मेघवाल जहां श्रीगंगानगर से मजबूती से दावेदारी जता रहे हैं, वहीं केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने भी श्रीगंगानगर सीट पर रुचि जता कर निहालचंद के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।
टिकट मांग रहे सभी दावेदार निहालचंद को घेरे हुए हैं। दावेदार आलाकमान तक रेप केस का विवरण पहुंचा रहे हैं और बता रहे हैं कि अगर निहालचंद को टिकट दिया गया तो न केवल श्रीगंगानगर बल्कि पूरे राज्य में मतदाताओं में इसका गलत संदेश जाएगा।
विरोधियों के प्रयासों को विफल करने के लिए निहालचंद ने 'अभिनंदन की राजनीतिÓ को हथियार बनाया है। वह अपने नजदीकी लोगों की भीड़ मेंं अपना अभिनंदन करवा कर पार्टी के समक्ष अपना रुतबा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। रविवार को श्रीगंगानगर में आयोजित निहालचंद का अभिनंदन समारोह इसी रणनीति का हिस्सा है। बीजेपी में निहालचंद के कट्टर विरोधी ऐसे अभिनंदन समारोह का मजाक बना रहे हैं। उनका कहना है कि निहालचंद ने पार्टी कार्यकर्ताओं को कभी तरजीह नहीं दी। वे हमेशा कुछ चुनिंदा लोगों से घिरे नजर आए और अब उन्हीं लोगों के जरिए अभिनंदन करा कर आलाकमान की नजर में चढऩा चाहते हैं।
निहालचंद ने रविवार को श्रीगंगानगर में अपना अभिनंदन करवाया, अब इसके बाद रायसिंहनगर, करणपुर, सादुलशहर, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, पीलीबंगा, संगरिया में अभिनंदन कराने की तैयारी है।
निहालचंद के विरोधियों का कहना है कि देश में मोदी सरकार को सबसे पहले निहालचंद के कारण ही किरकिरी का सामना करना पड़ा था, जब रेप केस मेंं अदालत ने निहालचंद को नोटिस जारी किया। निहालचंद को मंत्री के रूप में फ्लॉप करार देकर खुद पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल से बाहर किया तो अब आलाकमान उन्हें किस आधार पर टिकट दे देगा। जहां निहालचंद टिकट का जुगाड़ करने के लिए भागदौड़ में जुटे हुए हैं, वहीं उनके विरोधी उनका टिकट कटवाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। किसकी जीत होती है और किसकी हार, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


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