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पंचायती राज विभाग के आदेश से उड़ गई है सरपंचों की नींद

- विकास कार्यों की ऑफलाइन स्वीकृति और भुगतान पर रोक लगाने से बेचैनी
श्रीगंगानगर। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से विकास कार्यों की ऑफलाइन स्वीकृतियों और भुगतान पर रोक लगाने के बाद सरपंचों में बेचैनी व्याप्त हो गई है। विभागीय स्तर पर इस संबंध में जो आदेश जारी हुआ है, उसके मुताबिक सभी ग्राम पंचायतों को अब ई-पंचायत पोर्टल के जरिए ही ऑनलाइन भुगतान करना होगा। ये आदेश छह मार्च से प्रभावी होगा। आदेश जारी होने के बाद श्रीगंगानगर जिले के सरंपच इसी बारे मेंं चर्चा करते नजर आ रहे हैं।
इस आदेश के तहत अब विकास कार्यों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के साथ ही मस्टरोल भी ऑनलाइन ही जारी हो सकेंगे। ऑनलाइन सिस्टम लागू होने का यह फरमान कई सरपंचों के गले नहीं उतर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी पंचायत समितियों के बीडीओ को ग्राम विकास अधिकारी व सरपंच की एसएसओ आईडी बनाकर ई-पंचायत पोर्टल पर मैपिंग के निर्देश दिए हैं। मैपिंग के बाद बैंक से पंजीकरण करवाना होगा।  आदेश में कहा गया है कि ई-पंचायत पोर्टल से भुगतान और स्वीकृति सहित अन्य कार्य नहीं करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि पंचायतीराज संस्थान को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए पिछली सरकार के दौरान 2016-17 के बजट घोषणा के क्रियान्वयन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से एकीकृत राज्य ई-पंचायत वेब एप्लीकेशन तैयार की गई थी। इसके तहत सभी जिलों में प्रत्येक पंचायत समिति में एक पंचायत का मॉडल के तौर पर चयन करते हुए ई-पंचायत पोर्टल शुरू हो चुका है। इस आदेश को लेकर सरपंचों का तर्क है कि अधिकतर सरपंच सहित अन्य
कर्मचारी ऑनलाइन कार्य के अभ्यस्त नहीं हैं। ऐसे में विकास कार्यों पर विपरीत असर पड़ सकता है।


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