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ओलिंपिक मेडल है गोल्फर दीक्षा डागर का टारगेट

-रैंकिंग के लिए छोड़ी परीक्षा
नई दिल्ली। अगर हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल से पार पाया जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है युवा गोल्फर दीक्षा डागर ने। दीक्षा बचपन से ही सुनने में असमर्थ हैं और मशीन के सहारे ही करीब की बातों को सुन पाती हैं। लेकिन अपनी प्रगति की राह में उन्होंने इसे बाधा नहीं बनने दिया और पिछले हफ्ते अफ्रीकी ओपन खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। अपने करियर के चौथे ही पेशेवर गोल्फ टूर्नमेंट में उन्होंने तीन बार की पूर्व वल्र्ड चैंपियन ली एने पेस को शिकस्त देकर सनसनी फैलाई। वह अदिति अशोक के बाद लेडीज यूरोपीय टूर का खिताब जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला हैं। आत्मविश्वास से ओतप्रोत दीक्षा का टारगेट अब 2020 तोक्यो ओलिंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।

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