एडीएम की जांच में दोषी, निलम्बित, सरकार बदली, बहाल
- प्रवर्तन अधिकारी संदीप गौड़ को फिर श्रीगंगानगर लगाया
श्रीगंगानगर। रसद विभाग में करीब डेढ़ साल पहले 1200 से अधिक फर्जी राशन कार्डों पर गेहूं उठाने के आरोप में राज्य सरकार से निलम्बित किए गए प्रवर्तन अधिकारी संदीप गौड़ को फिर से श्रीगंगानगर में लगा दिया है। पूर्व डिपो होल्डर महेन्द्र मेहता ने जिला कलेक्टर सहित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को शिकायत की थी, जिसके आधार पर जांच हुई। इसमें तत्कालीन एडीएम ने गौड़ को दोषी माना। जिला कलक्टर के आदेश पर फिर से जांच हुई। उसमें भी इन्हें दोषी ही माना गया।
इस पर सरकार ने निलम्बित कर दिया। साथ ही, अन्य गेहूं आदि उठाने के आरोप में तत्कालीन डीएसओ सुनील वर्मा को भी एपीओ किया गया था। तब भाजपा की सरकार थी। सरकार बदली, अब जब कांग्रेस की सरकार है तो इन दोनों ही अधिकारियों को बहाल कर दिया गया है। सुनील वर्मा को भीलवाड़ा डीएसओ लगाया गया है और संदीप गौड़ को बहाल करते हुए बीकानेर रसद अधिकारी लगाया। लेकिन गौड़ ने वहां कार्यभार नहीं संभाला, तो फिर इन्हें श्रीगंगानगर में उसी पद पर लगा दिया। स्थानांतरण आदेश के एक घंटे बाद ही इन्होंने कार्यभार भी संभाल लिया। सवाल उठता है कि यदि पूर्व में लगाए गए आरोप की जांच में दोषी थे तो फिर कांग्रेस सरकार ने इन्हें उसी पद पर, उसी जगह क्यों लगाया?
श्रीगंगानगर। रसद विभाग में करीब डेढ़ साल पहले 1200 से अधिक फर्जी राशन कार्डों पर गेहूं उठाने के आरोप में राज्य सरकार से निलम्बित किए गए प्रवर्तन अधिकारी संदीप गौड़ को फिर से श्रीगंगानगर में लगा दिया है। पूर्व डिपो होल्डर महेन्द्र मेहता ने जिला कलेक्टर सहित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को शिकायत की थी, जिसके आधार पर जांच हुई। इसमें तत्कालीन एडीएम ने गौड़ को दोषी माना। जिला कलक्टर के आदेश पर फिर से जांच हुई। उसमें भी इन्हें दोषी ही माना गया।
इस पर सरकार ने निलम्बित कर दिया। साथ ही, अन्य गेहूं आदि उठाने के आरोप में तत्कालीन डीएसओ सुनील वर्मा को भी एपीओ किया गया था। तब भाजपा की सरकार थी। सरकार बदली, अब जब कांग्रेस की सरकार है तो इन दोनों ही अधिकारियों को बहाल कर दिया गया है। सुनील वर्मा को भीलवाड़ा डीएसओ लगाया गया है और संदीप गौड़ को बहाल करते हुए बीकानेर रसद अधिकारी लगाया। लेकिन गौड़ ने वहां कार्यभार नहीं संभाला, तो फिर इन्हें श्रीगंगानगर में उसी पद पर लगा दिया। स्थानांतरण आदेश के एक घंटे बाद ही इन्होंने कार्यभार भी संभाल लिया। सवाल उठता है कि यदि पूर्व में लगाए गए आरोप की जांच में दोषी थे तो फिर कांग्रेस सरकार ने इन्हें उसी पद पर, उसी जगह क्यों लगाया?

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