मेदांता के रूप में इलाके को मिली विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं
- यहां से उपचार लेने वाले रोगियों ने सांझा किए अनुभव
श्रीगंगानगर। मेदांता दी मेडिसीटी हॉस्पीटल के रूप में इलाके के लोगों को बड़े शहरों जैसी चिकित्सकीय सुविधाएं मिली हैं। मेदांता के यहां शुरू होने से लोगों को बहुत बड़ी राहत मिली है। इस हॉस्पीटल में गंभीर से गंभीर रोगियों को जीवनदान दिया जा रहा है। शनिवार को मेदांता हॉस्पीटल में पत्रकार वार्ता के दौरान यहां से सफल इलाज करवा चुके लोगों ने अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग भाग्यशाली हैं कि उन्हें विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधा कार्य खर्च में अपने शहर में मिल रही है। पत्रकार वार्ता में जैतसर के आशीष कुमार ने बताया कि उनकी धर्मपत्नी को डिलीवरी होने वाली थी, लेकिन गर्भ में बच्चे की स्थिति ऐसी नहीं थी कि डिलीवरी करवाई जा सके। गंगानगर से लेकर जयपुर तक के बड़े चिकित्सकों ने प्रसव के दौरान परेशानी बताते हुए जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बताया गया था। इसके बाद उन्होंने मेदांता के चिकित्सकों से सम्पर्क किया तो यहां सफल डिलीवरी करवाते हुए माँ-बेटा दोनों की जान बचा ली गई।
इसी तरह अमनदीप कौर ने बताया कि उसके प्री-मैच्योर बेबी की डिलीवरी मेदांता में करवाई गई। साढ़े छह माह के बच्चे का जन्म करवाना आसान नहीं था।
कई डॉक्टरों ने प्रसव करवाने से इनकार कर दिया था। लेकिन मेदांता में राहत मिली। प्रसव के बाद बच्ची भी स्वस्थ है। अमनदीप कौर ने बताया कि मेदांता का स्टाफ व्यावहारिक और आर्थिक रूप से भी मदद करने वाला है। यहां सामान्य अस्पताल जितने खर्चे पर इलाज किया जा रहा है।
हनुमानगढ़ जिले के धोलीपाल गांव के अधिवक्ता प्रेमकुमार का सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मेदांता में उपचार करवाया गया तो जीवनदान मिल गया। इससे पहले हनुमानगढ़ के सरकारी अस्पताल में तो उनके ब्रेनडेड की आशंका जता दी गई थी। लेकिन मेदांता में डॉ. संदीप सिहाग ने पूरे आत्मविश्वास के साथ उपचार शुरू करते हुए ब्रेन से नहीं जाने देने का भरोसा दिलाया था। करीब डेढ़ महीने तक वैन्टीलेटर पर रखते हुए प्रेम कुमार का इलाज किया गया और जान बचा ली गई।
65 वर्षीय बुजुर्ग निशान सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें हार्ट प्रोब्लम होने पर मेदांता में लाया गया था। यहां लाते ही अस्पताल स्टाफ ने उनकी देखभाल शुरू कर दी और पेसमेकर लगाकर उनकी जान बचा ली गई। तीन दिन तक वे आईसीयू में रहे, लेकिन उन्हें किसी तरह की तकलीफ नहीं हुई। यहां के स्टाफ ने पारिवारिक सदस्य की तरह व्यवहार किया। जैसा इलाज मेदांता में रोगियों का किया जाता है, इस तरह की सुविधा भाग्यशाली लोगों को ही मिलती है।
श्रीगंगानगर। मेदांता दी मेडिसीटी हॉस्पीटल के रूप में इलाके के लोगों को बड़े शहरों जैसी चिकित्सकीय सुविधाएं मिली हैं। मेदांता के यहां शुरू होने से लोगों को बहुत बड़ी राहत मिली है। इस हॉस्पीटल में गंभीर से गंभीर रोगियों को जीवनदान दिया जा रहा है। शनिवार को मेदांता हॉस्पीटल में पत्रकार वार्ता के दौरान यहां से सफल इलाज करवा चुके लोगों ने अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग भाग्यशाली हैं कि उन्हें विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधा कार्य खर्च में अपने शहर में मिल रही है। पत्रकार वार्ता में जैतसर के आशीष कुमार ने बताया कि उनकी धर्मपत्नी को डिलीवरी होने वाली थी, लेकिन गर्भ में बच्चे की स्थिति ऐसी नहीं थी कि डिलीवरी करवाई जा सके। गंगानगर से लेकर जयपुर तक के बड़े चिकित्सकों ने प्रसव के दौरान परेशानी बताते हुए जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बताया गया था। इसके बाद उन्होंने मेदांता के चिकित्सकों से सम्पर्क किया तो यहां सफल डिलीवरी करवाते हुए माँ-बेटा दोनों की जान बचा ली गई।
इसी तरह अमनदीप कौर ने बताया कि उसके प्री-मैच्योर बेबी की डिलीवरी मेदांता में करवाई गई। साढ़े छह माह के बच्चे का जन्म करवाना आसान नहीं था।
कई डॉक्टरों ने प्रसव करवाने से इनकार कर दिया था। लेकिन मेदांता में राहत मिली। प्रसव के बाद बच्ची भी स्वस्थ है। अमनदीप कौर ने बताया कि मेदांता का स्टाफ व्यावहारिक और आर्थिक रूप से भी मदद करने वाला है। यहां सामान्य अस्पताल जितने खर्चे पर इलाज किया जा रहा है।
हनुमानगढ़ जिले के धोलीपाल गांव के अधिवक्ता प्रेमकुमार का सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मेदांता में उपचार करवाया गया तो जीवनदान मिल गया। इससे पहले हनुमानगढ़ के सरकारी अस्पताल में तो उनके ब्रेनडेड की आशंका जता दी गई थी। लेकिन मेदांता में डॉ. संदीप सिहाग ने पूरे आत्मविश्वास के साथ उपचार शुरू करते हुए ब्रेन से नहीं जाने देने का भरोसा दिलाया था। करीब डेढ़ महीने तक वैन्टीलेटर पर रखते हुए प्रेम कुमार का इलाज किया गया और जान बचा ली गई।
65 वर्षीय बुजुर्ग निशान सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें हार्ट प्रोब्लम होने पर मेदांता में लाया गया था। यहां लाते ही अस्पताल स्टाफ ने उनकी देखभाल शुरू कर दी और पेसमेकर लगाकर उनकी जान बचा ली गई। तीन दिन तक वे आईसीयू में रहे, लेकिन उन्हें किसी तरह की तकलीफ नहीं हुई। यहां के स्टाफ ने पारिवारिक सदस्य की तरह व्यवहार किया। जैसा इलाज मेदांता में रोगियों का किया जाता है, इस तरह की सुविधा भाग्यशाली लोगों को ही मिलती है।

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