जल्द ही आने वाले हैं नशे के सौदागरों के बुरे दिन
- तस्करों को दबोचने के लिए अब बिना औपचारिकता झपट्टा मारेगी पुलिस
- चार मुख्यमंत्रियों और आला अफसरों की मौजूदगी मेंं बड़ा फैसला
चंडीगढ़। जल्द ही नशे के सौदागरों के बुरे दिन आने वाले हैं। तस्करों को दबोचने के लिए अब पुलिस सात राज्यों मेंं जहां चाहे बिना औपचारिकता झपट्टा मार सकेगी। नशा तस्करों को पकडऩे के लिए किसी राज्य की सीमा अब पुलिस की राह में रोड़ा नहीं बनेगी। पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़-राजस्थान समेत सात राज्यों ने इसके लिए एकजुट होकर बड़ा अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके अनुसार नशा तस्करी में किसी आरोपी को पकडऩे के लिए पुलिस दूसरे राज्यों में बिना औपचारिकता कार्रवाई कर पाएगी।
सभी राज्यों की पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ जॉइंट ऑपरेशन चलाएगी। साथ ही इन राज्यों में हाईटेक नाके लगाए जाएंगे। सभी राज्य आरोपी का डाटा आपस में शेयर करेंगे। यहां फिंगर प्रिंट और रेटिना स्कैनर के जरिये नशा तस्करों की पहचान हो पाएगी। इसके लिए पंचकूला में जॉइंट सेक्रेटेरिएट बनाया जाएगा। इसमें उक्त राज्यों से एक-एक नोडल अफसर बैठेगा। सोमवार को हरियाणा के सीएम आवास पर हुई मीटिंग में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों और राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ के अफसरों ने इस पर चर्चा की। बैठक में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक शामिल हुए।
हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ भी शामिल
मीटिंग में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ से गृह विभाग के अफसर पहुंचे। वहीं, हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग में फैसला लिया गया कि यूपी और जम्मू-कश्मीर को भी इस मुहिम में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा।
कई बार तस्कर दूसरे राज्यों में छिप जाते हैं। कार्रवाई के लिए पुलिस को कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। अब दूसरे राज्य में छिपे तस्कर को पकडऩे के लिए पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही मदद के लिए टीम तैयार मिलेगी। इससे कार्रवाई आसान होगी।
नशे के आदी युवाओं को इससे मुक्ति दिलाने के लिए सरकारी और प्राइवेट नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। नशा करने वालों की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा। हर गांव को इस अभियान में शामिल किया जाएगा।
डीजीपी होंगे नोडल अफसर
मीडिया से बातचीत में कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनोहर लाल खट्टर और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ढाई घंटे चली मीटिंग में उक्त सभी राज्यों में नशा रोकने के लिए मंथन किया गया है। सभी राज्यों की एक राय है कि नशे को रोका जाए। इसके लिए हर राज्य में डीजीपी या एडीजीपी स्तर के अफसर को नोडल अफसर बनाया जाएगा। हर छह महीने बाद सभी राज्यों के सीएम अभियान की समीक्षा करेंगे। अफसरों को हर तीन महीने बाद मीटिंग कर अभियान पर चर्चा करनी होगी।
- चार मुख्यमंत्रियों और आला अफसरों की मौजूदगी मेंं बड़ा फैसला
चंडीगढ़। जल्द ही नशे के सौदागरों के बुरे दिन आने वाले हैं। तस्करों को दबोचने के लिए अब पुलिस सात राज्यों मेंं जहां चाहे बिना औपचारिकता झपट्टा मार सकेगी। नशा तस्करों को पकडऩे के लिए किसी राज्य की सीमा अब पुलिस की राह में रोड़ा नहीं बनेगी। पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़-राजस्थान समेत सात राज्यों ने इसके लिए एकजुट होकर बड़ा अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके अनुसार नशा तस्करी में किसी आरोपी को पकडऩे के लिए पुलिस दूसरे राज्यों में बिना औपचारिकता कार्रवाई कर पाएगी।
सभी राज्यों की पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ जॉइंट ऑपरेशन चलाएगी। साथ ही इन राज्यों में हाईटेक नाके लगाए जाएंगे। सभी राज्य आरोपी का डाटा आपस में शेयर करेंगे। यहां फिंगर प्रिंट और रेटिना स्कैनर के जरिये नशा तस्करों की पहचान हो पाएगी। इसके लिए पंचकूला में जॉइंट सेक्रेटेरिएट बनाया जाएगा। इसमें उक्त राज्यों से एक-एक नोडल अफसर बैठेगा। सोमवार को हरियाणा के सीएम आवास पर हुई मीटिंग में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों और राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ के अफसरों ने इस पर चर्चा की। बैठक में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक शामिल हुए।
हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ भी शामिल
मीटिंग में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और राजस्थान, दिल्ली व चंडीगढ़ से गृह विभाग के अफसर पहुंचे। वहीं, हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग में फैसला लिया गया कि यूपी और जम्मू-कश्मीर को भी इस मुहिम में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा।
कई बार तस्कर दूसरे राज्यों में छिप जाते हैं। कार्रवाई के लिए पुलिस को कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। अब दूसरे राज्य में छिपे तस्कर को पकडऩे के लिए पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही मदद के लिए टीम तैयार मिलेगी। इससे कार्रवाई आसान होगी।
नशे के आदी युवाओं को इससे मुक्ति दिलाने के लिए सरकारी और प्राइवेट नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। नशा करने वालों की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा। हर गांव को इस अभियान में शामिल किया जाएगा।
डीजीपी होंगे नोडल अफसर
मीडिया से बातचीत में कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनोहर लाल खट्टर और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ढाई घंटे चली मीटिंग में उक्त सभी राज्यों में नशा रोकने के लिए मंथन किया गया है। सभी राज्यों की एक राय है कि नशे को रोका जाए। इसके लिए हर राज्य में डीजीपी या एडीजीपी स्तर के अफसर को नोडल अफसर बनाया जाएगा। हर छह महीने बाद सभी राज्यों के सीएम अभियान की समीक्षा करेंगे। अफसरों को हर तीन महीने बाद मीटिंग कर अभियान पर चर्चा करनी होगी।
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