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सिंधियत को बचाने के लिए सिंधी भाषा का प्रयोग जरूरी

श्रीगंगानगर। किसी भी संस्कृति को जीवित रखने के लिए भाषा एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बिंदु है। अगर सिन्धियत को बचाना है तो सिंधी भाषा का अधिक से अधिक उपयोग करें। सिन्ध स्मृति दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कुछ इस तरह के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा हमारी आत्मा है। अगर आत्मा नहीं रहेगी तो हमारा अस्तित्व भी नहीं रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता पूजन तथा ईष्ट देवता झूलेलाल तथा अमर शहीद हेमू कालाणी के दीप प्रज्वलन के साथ हुई। तत्पश्चात सिंधी समाज के जनक जैसानी, हिमांशु दुलानी, सोनिया मोत्यांनी इत्यादि ने विचार व्यक्त किए।

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