अब मानवाधिकार आयोग की एंट्री से खलबली! क्या खत्म होगा कैशलेस योजना में 'कैश' का अकाल?
राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आरजीएचएस इन दिनों खुद 'आईसीयूÓ में नजर आ रही है। प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी, जो कल तक कैशलेस इलाज के भरोसे निश्चिंत थे, आज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। इस संकट की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस पूरे मामले पर सुओ मोटो संज्ञान लिया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इलाज में देरी या उपचार से इनकार करना सीधे तौर पर 'मानवाधिकारों का उल्लंघनÓ है।
1 मई 2026 को जारी अपने आदेश में मानवाधिकार आयोग ने उन मीडिया रिपोट्र्स का हवाला दिया, जिनमें बताया गया कि कैसे सरकारी कर्मचारियों को निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों से बैरंग लौटाया जा रहा है।

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