बीवी-बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी न करें: हाई कोर्ट
एक बार जब कोई पुरुष किसी महिला से शादी कर लेता है तो कानून के तहत उसका भरण-पोषण करना उसकी बाध्यता बन जाती है। कोर्ट ने कहा कि जो पुरुष यह महसूस करते हैं कि अगर शादीशुदा जिंदगी में खटास आ जाए तो वह पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा पाएंगे, उन्हें तो शुरू में शादी ही नहीं करनी चाहिए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेंटेनेंस केस को लेकर पति द्वारा दाखिल याचिका को खारिज करते हुए एक अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की बेंच ने कहा कि कोई भी पुरुष अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जि़म्मेदारी से बचने के लिए अपनी खराब आर्थिक हालत का बहाना नहीं बना सकता।

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