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आस्था के आंगन में सत्ता का संग्राम


श्रीगंगानगर के दुर्गा मंदिर प्रबंध समिति की आमसभा में जो दृश्य सामने आया, वह केवल एक संस्थागत विवाद नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के लिए गंभीर चेतावनी है। जिस स्थान को श्रद्धा, संयम और मर्यादा का प्रतीक होना चाहिए, वहीं हंगामा, धक्का-मुक्की और आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बन जाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि समाज के नैतिक संतुलन पर भी सवाल खड़ा करता है। ऐसा अक्सर कई संंस्थाओं में होता है।
मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं होता, वह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक अनुशासन का केंद्र भी होता है। लेकिन जब उसी मंच पर नेतृत्व के लिए खींचतान इस हद तक बढ़ जाए कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो यह दर्शाता है कि आस्था के स्थानों पर भी अब राजनीति की छाया गहराने लगी है।

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