हाईकोर्ट का जातिगत विवाद पर ऐतिहासिक फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा रद्द कर उसे बरी कर दिया है. जस्टिस फरजंद अली की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैसों के लेन-देन या आर्थिक विवाद को जातिगत अपमान का रंग नहीं दिया जा सकता.
कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए है, लेकिन दोषसिद्धि के लिए यह साबित होना जरूरी है कि अपमान 'जाति के कारणÓ और 'सार्वजनिक दृष्टिÓ में हुआ हो. महज जातिसूचक शब्द कहना सजा का आधार नहीं हो सकता यदि मूल विवाद आर्थिक हो. इसी के साथ 1993 का दोषसिद्धि आदेश रद्द कर दिया गया.

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