दोषी सिद्ध नहीं होने तक आरोपी ही माना जाता है, फोटो जारी करना गलत - राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में व्यक्ति के आरोपी होने और गिरफ्तार होने से वह दोषी सिद्ध नहीं हो जाता है. कोर्ट ने पुलिस की ओर से आरोपी को गिरफ्तार कर थाने के बाहर उसकी फोटो खींच कर जारी करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने इसे मानव गरिमा और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है. इस मामले कोर्ट ने अधिवक्ता देवकीनंदन व्यास को न्याय मित्र भी नियुक्त किया है.
व्यास ने बताया कि कोर्ट ने जैसलमेर पुलिस ने एक परिवार के लोगों की गिरफ्तारी के बाद उनके फोटो खिंचवाए थे, जो सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों में प्रसारित हुए थे.

No comments