सात दोषियों की फांसी की सजा पर लगाई रोक
नई दिल्ली। एक घटना जिसने हरियाणा को हिला दिया था। एक वारदात जिसने लोगों की रूह कंपा दी थी, एक केस जिसमें सभी बालिग दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। दरअसल, रोहतक में 9 दोषियों ने मानसिक रूप से बीमार युवती के साथ हैवानियत की सारे हदें पार कर दी थीं। उन दरिंदों ने हाईकोर्ट से सज़ा में रियायत की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने सातों दोषियों की मौत की सज़ा बरकार रखी थी।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब शीर्ष अदालत ने सातों दोषियों की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया है। रोहतक गैंगरेप का यह वीभत्स मामला फरवरी 2015 का है। दरअसल, नेपाली मूल की एक लड़की के साथ सात आरोपियों ने गैंगरेप किया था और बाद में उनकी हत्या कर दी थी। इस हैवानियत से मानवता शर्मसार हो गई थी। इस मामले में रोहतक जिला अदालत ने महज 10 महीने में सुनवाई पूरी करते हुए सजा का ऐलान कर दिया था। नौ दरिंदों में से 7 दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। एक दोषी नाबालिग है, जिसे 2018 में तीन साल की सज़ा सुनाते हुए बाल सुधार गृह भेजा गया था। वहीं, एक दोषी ने केस की सुनवाई के दौरान खुदकुशी कर ली थी।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब शीर्ष अदालत ने सातों दोषियों की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया है। रोहतक गैंगरेप का यह वीभत्स मामला फरवरी 2015 का है। दरअसल, नेपाली मूल की एक लड़की के साथ सात आरोपियों ने गैंगरेप किया था और बाद में उनकी हत्या कर दी थी। इस हैवानियत से मानवता शर्मसार हो गई थी। इस मामले में रोहतक जिला अदालत ने महज 10 महीने में सुनवाई पूरी करते हुए सजा का ऐलान कर दिया था। नौ दरिंदों में से 7 दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। एक दोषी नाबालिग है, जिसे 2018 में तीन साल की सज़ा सुनाते हुए बाल सुधार गृह भेजा गया था। वहीं, एक दोषी ने केस की सुनवाई के दौरान खुदकुशी कर ली थी।

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