करोड़ों की जमीन के मामले की जांच शुरू
- उप रजिस्ट्रार कार्यालय से रिकॉर्ड तलब
श्रीगंगानगर। कोतवाली पुलिस ने जस्सा सिंह मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपए की जमीन मामले में दर्ज मुकदमे की जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी ने सोमवार को घटनास्थल का मौका मुआयना किया। इसके साथ ही उप रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। सेठ लच्छीराम गिदड़ा ने अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन को गिफ्ट कर दिया था। इन्हीं रिश्तेदारों ने मन बदलने पर अपने नाम जमीन को बेच दिया। खरीददारों ने खरीदी जमीन गई जमीन के बजाए अन्य जमीन पर कब्जा कर लिया।
जांच अधिकारी कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी हनुमानाराम बिश्रोई ने बताया कि बृजलाल पुत्र लच्छीराम अग्रवाल निवासी 3 बी-14 मीरा मार्ग जवाहरनगर की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश निवासी अमरनाथ के पुत्र-पुत्रियों उपरेन्द्र नाथ, मनोज कुमार, रीता रानी व चित्रलेखा, श्रीगंगानगर निवासी अमित सिंगल, अमिताभ खैरवा, श्याम कालड़ा, राजदीप सिंह, हेमंत कुमार, आशीष गुप्ता, विनोद ताखर, सुरेन्द्रपाल सिंह सरपंच, दिपेश बिश्रोई पटवारी व एक अन्य के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 447, 120 बी, 147, 149 में मुकदमा दर्ज करवाया था। कल उन्होंने मौके पर जाकर मुकदमे में नक्शा मौका की कार्रवाई की। उन्होंने तहसील कार्यालय में स्थित उप रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित जमीन की रजिस्ट्री के कागजात मांगे हैं। कोतवाल ने बताया कि रिकॉर्ड लेकर जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि बृजलाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार की चक 3 ए छोटी मुरब्बा नम्बर 7, 11 व 20 में कृषि भूमि है। उसके पिता लच्छीराम ने उक्त भूमि में से मुरब्बा नम्बर 7 उसके नाम से बंटवारानामा कर दी और मुरब्बा नम्बर 11 की 3 बीघा 1 बिस्वा भूमि अपने पुत्र मुरली मनोहर जरिए बंटवारारामा कर दी। मुरब्बा नम्बर 11 की शेष 16 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता लच्छीराम की थी। पिता ने अपनी भूमि पोती पुष्पा देवी पत्नी प्रकाशचंद्र जैन को वसीयत कर दी। इसी जमीन के पास मुरब्बा नम्बर 20 में 24 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता ने अमरनाथ को गिफ्ट कर दी। अमरनाथ के निधन के बाद इस भूमि का इंतकाल उसके वारिसान उपेन्द्रनाथ, मनोज, पुत्रियां रीता व चित्रलेखा के नाम से हुआ। उसके पिता लच्छीराम का देहांत 14 अगस्त 2002 को हुआ। उसके पिता लच्छीराम द्वारा मुरब्बा नम्बर 7 व 11 की भूमि के संबंध में की गई बंद वसीयत 31 मार्च 1998 को 30 अगस्त 2002 को खुलवाया गया। अमरनाथ के वारिसानों ने अपनी जमीन को आरोपियों को बेच दिया। आरोपियों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन की तारबंदी करते हुए वहां गेट भी लगा दिया और उस पर लिख दिया अमिताभ खैरवा की निजी सम्पत्ति।
श्रीगंगानगर। कोतवाली पुलिस ने जस्सा सिंह मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपए की जमीन मामले में दर्ज मुकदमे की जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी ने सोमवार को घटनास्थल का मौका मुआयना किया। इसके साथ ही उप रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। सेठ लच्छीराम गिदड़ा ने अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन को गिफ्ट कर दिया था। इन्हीं रिश्तेदारों ने मन बदलने पर अपने नाम जमीन को बेच दिया। खरीददारों ने खरीदी जमीन गई जमीन के बजाए अन्य जमीन पर कब्जा कर लिया।
जांच अधिकारी कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी हनुमानाराम बिश्रोई ने बताया कि बृजलाल पुत्र लच्छीराम अग्रवाल निवासी 3 बी-14 मीरा मार्ग जवाहरनगर की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश निवासी अमरनाथ के पुत्र-पुत्रियों उपरेन्द्र नाथ, मनोज कुमार, रीता रानी व चित्रलेखा, श्रीगंगानगर निवासी अमित सिंगल, अमिताभ खैरवा, श्याम कालड़ा, राजदीप सिंह, हेमंत कुमार, आशीष गुप्ता, विनोद ताखर, सुरेन्द्रपाल सिंह सरपंच, दिपेश बिश्रोई पटवारी व एक अन्य के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 447, 120 बी, 147, 149 में मुकदमा दर्ज करवाया था। कल उन्होंने मौके पर जाकर मुकदमे में नक्शा मौका की कार्रवाई की। उन्होंने तहसील कार्यालय में स्थित उप रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित जमीन की रजिस्ट्री के कागजात मांगे हैं। कोतवाल ने बताया कि रिकॉर्ड लेकर जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि बृजलाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार की चक 3 ए छोटी मुरब्बा नम्बर 7, 11 व 20 में कृषि भूमि है। उसके पिता लच्छीराम ने उक्त भूमि में से मुरब्बा नम्बर 7 उसके नाम से बंटवारानामा कर दी और मुरब्बा नम्बर 11 की 3 बीघा 1 बिस्वा भूमि अपने पुत्र मुरली मनोहर जरिए बंटवारारामा कर दी। मुरब्बा नम्बर 11 की शेष 16 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता लच्छीराम की थी। पिता ने अपनी भूमि पोती पुष्पा देवी पत्नी प्रकाशचंद्र जैन को वसीयत कर दी। इसी जमीन के पास मुरब्बा नम्बर 20 में 24 बीघा 1 बिस्वा भूमि उसके पिता ने अमरनाथ को गिफ्ट कर दी। अमरनाथ के निधन के बाद इस भूमि का इंतकाल उसके वारिसान उपेन्द्रनाथ, मनोज, पुत्रियां रीता व चित्रलेखा के नाम से हुआ। उसके पिता लच्छीराम का देहांत 14 अगस्त 2002 को हुआ। उसके पिता लच्छीराम द्वारा मुरब्बा नम्बर 7 व 11 की भूमि के संबंध में की गई बंद वसीयत 31 मार्च 1998 को 30 अगस्त 2002 को खुलवाया गया। अमरनाथ के वारिसानों ने अपनी जमीन को आरोपियों को बेच दिया। आरोपियों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन की तारबंदी करते हुए वहां गेट भी लगा दिया और उस पर लिख दिया अमिताभ खैरवा की निजी सम्पत्ति।

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