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श्रीगंगानगर जिले के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलेगा राजनीतिक नियुक्तियों का प्रसाद

- कांग्रेस ने शुरू की राजनीतिक नियुक्तियों के तहत विभिन्न पदों को भरने की तैयारी
श्रीगंगानगर। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में करारी हार के बाद हताशा में डूबे श्रीगंगानगर जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक ऐसी अच्छी खबर आ रही है, जिसे सुनकर वे खुशी से झूम उठेंगे। कांग्रेस आलाकमान ने श्रीगंगानगर जिले समेत पूरे प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां देने की तैयारियां शुरू कर दी है। जिले मेंं जिला स्तरीय समितियों मेंं तीन सौ से अधिक पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कोई न कोई पद देने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार यह राजनीतिक नियुक्तियां दो चरणों मेंं होंगी। पहले चरण में जिला स्तरीय समितियों में और दूसरे चरण में प्रदेश स्तरीय समितियों में नियुक्तियों का कार्य किया जाएगा। पार्टी ने इस काम को सिरे चढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। जिन लोगों को नियुक्तियां दी जाएंगी, उनके नाम कांग्रेस मेंं संगठन स्तर पर तय किए जाएंगे और फिर उन पर आदेश जारी करने के लिए सरकार को भिजवा दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जिला स्तर पर होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस के विधायकों की राय को तरजीह दी जाएगी। जहां कांग्रेस विधायक नहीं हैं, वहां विधानसभा में हारे हुए कांग्रेस उम्मीदवारों की राय ली जाएगी।
जिला स्तर पर दर्जन भर समितियां हैं, जिनमें गैर सरकारी सदस्यों के पद खाली हैं। इनमें जिला सतर्कता समिति, उपभोक्ता संरक्षण समिति, जिला स्तरीय पुलिस समिति, बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, जिला वक्फ समिति, जिला जन अभाव अभियोग निराकरण समिति सहित विभिन्न समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी। गौरतलब है कि गत वर्ष दिसंबर के अंत में नई सरकार के गठन के बाद बीजेपी सरकार के समय की गई सभी राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। उसके बाद करीब छह महीने से प्रदेश से लेकर जिलों तक के बोर्ड, निगम और समितियों में गैर सरकारी सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से पार्टी सियासी समीकरण साधने के साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने की कोशिश भी करेगी।
श्रीगंगानगर में यूआईटी और पंजाबी अकादमी महत्वपूर्ण
श्रीगंगानगर में वैसे तो विभिन्न समितियों के पदों को भरा जाएगा लेकिन यहां पंजाबी भाषा अकादमी तथा यूआईटी अध्यक्ष के पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पंजाबी भाषा अकादमी अध्यक्ष को तो राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाता है। राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट शुरू हो जाने से कांग्रेस नेताओं के इन पदों के लिए सक्रिय होने का समय आ गया है।


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