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शिक्षकों को मिला सुकून, अब ग्रीष्मावकाश में नहीं लगेंगे आवासीय प्रशिक्षण शिविर

- शिक्षा मंत्री ने जारी किए आदेश, शिक्षकों मेंं प्रसन्नता की लहर
श्रीगंगानगर। शिक्षकों को अब ग्रीष्मावकाश में प्रशिक्षण नहीं दिया जाएगा। शिक्षकों के प्रशिक्षण भी अब गैर आवासीय होंगे। प्रशिक्षण चालू शिक्षा सत्र में ही करवाए जांएगे। राज्य इसके लिए सरकार ने गाइड लाइन तैयार करने के लिए शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से शिक्षकों को सुकून मिला है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की विशेष समीक्षा बैठक में यह निर्णय किया गया है। सरकार ने तय किया है कि शिक्षकों के प्रशिक्षण शिविर शिक्षकों की शिक्षण आवश्यकताओं, बच्चों के सीखने के स्तर में वृद्धि और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी स्तरों पर सुनिश्चित कराने को ध्यान में रखते हुए करवाए जाएंगे। प्रशिक्षण केवल खानापूर्ति के लिए नहीं होंगे, विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में वृद्धि के हिसाब से इन्हें करवाया जाएगा ताकि प्रशिक्षण का लाभ समुचित रूप में विभाग को मिल सके।
डाइट संस्थाओं को करेंगे सुदृढ़
सरकार ने प्रदेश के जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान 'डाइट्सÓ संस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि पिछली सरकार में डाइट्स पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अधिकांश डाइट्स बंद पड़ी रही, उनके संसाधन भी अनुपयोगी हो गए थे। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने यह तय किया है कि सभी जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों की समीक्षा की जाए। उन्हें मजबूत किया जाएगा और उन्हें शिक्षक प्रशिक्षण के उत्कृष्ट केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें शिक्षकों को भी जल्द लगाया जाएगा ताकि वे अपने मूल कार्य शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभावी केन्द्र फिर से बन सकें।
सरकार का मानना है कि स्टाफिंग पैटर्न की पिछले चार साल में कोई समीक्षा नहीं की गयी। इससे शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में गत सरकार में भारी गड़बडिय़ां रहीं। राज्य सरकार ने स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा की पहल की है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश के विद्यालयों में छात्र संख्या की अनुपात में शिक्षकों के स्थानान्तरण और पदस्थापन हों।
शिक्षकों के पद भरने के प्रस्ताव
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जन अपेक्षाओं और विभागीय जरूरतों के हिसाब से जन घोषणा पत्र के बिन्दुओं की त्वरित पालना की जाए। विद्यालय क्रमोन्नयन, आवश्यकतानुसार पंचायत समितियों में नए विद्यालय खोले जाने और वहां पर शिक्षकों के पद भरने संबधित प्रस्ताव भी तैयार कर उन पर कार्यवाही किए जाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।


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