अधूरे काम के भुगतान की तैयारी
- पूरे नहीं बने अत्याधुनिक शौचालय
श्रीगंगानगर। पिछली सरकार के आखिरी बजट में की गई घोषणा के तहत शहर में चार स्थानों पर अत्याधुनिक शौचालयों का निर्माण शुरू किया गया था। इन शौचालयों का निर्माण कार्य दिसम्बर 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस बीच नगर परिषद की ओर से शौचालय के अधूरे कार्य के बावजूद संबंधित ठेकेदारों को करीब दो करोड़ रुपए के भुगतान की तैयारी कर ली गई है। ठेकेदारों की और से पेश किए गए बिलों पर भुगतान के लिए पत्रावली अंतिम चरण में है। सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह संबंधित ठेकेदारों को भुगतान कर दिया जाएगा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा के तहत जिला मुख्यालय पर ढाई करोड़ रुपए से पांच अत्याधुनिक शौचालय बनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेशों की पालना में नगर परिषद ने मुख्य बस स्टैण्ड से, इंदिरा वाटिका में नगर परिषद परिसर, वार्ड नंबर 46 और वार्ड नंबर पांच में अत्याधुनिक शौचालय निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया चलाई। निविदा में प्रत्येक कार्य की अनुमानित लागत 50 लाख
रुपए बताई गई। निविदा प्रक्रिया पूरी होने पर वार्ड नंबर पांच को छोड़कर बाकी चार स्थानों पर शौचालय निर्माण के कार्यादेश संबंधी ठेकेदार फर्मों को जारी कर दिए गए। इन आदेशों में निर्माण कार्य दिसम्बर 2018 में पूरा करने की शर्त शामिल थी।
सूत्रों के अनुसार इस बीच विधानसभा चुनाव आचारसंहिता लगने के साथ ही ठेकेदारों ने शौचालयों का निर्माण कार्य बंद कर दिया। अब अधूरे काम के ही बिल बनाकर भुगतान की जुगत लगाई गई है।
सशर्त होगा भुगतान
इस मामले में सभापति अजय चाण्डक का कहना है कि अत्याधुनिक शौचालयों के निर्माण कार्य के चलते ठेकेदारों को पार्ट पेमेंट का भुगतान किया जा सकता है। नियमानुसार ही भुगतान की कार्यवाही की जा रही है। इस बार ठेकेदारों को इस शर्त पर भुगतान किया जा रहा है कि वे भुगतान होने के बाद अधूरे शौचालयों का निर्माण पूरा करवाएंगे। यदि ठेकेदारों ने शर्त की पालना नहीं की तो उन्हें भविष्य के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
श्रीगंगानगर। पिछली सरकार के आखिरी बजट में की गई घोषणा के तहत शहर में चार स्थानों पर अत्याधुनिक शौचालयों का निर्माण शुरू किया गया था। इन शौचालयों का निर्माण कार्य दिसम्बर 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस बीच नगर परिषद की ओर से शौचालय के अधूरे कार्य के बावजूद संबंधित ठेकेदारों को करीब दो करोड़ रुपए के भुगतान की तैयारी कर ली गई है। ठेकेदारों की और से पेश किए गए बिलों पर भुगतान के लिए पत्रावली अंतिम चरण में है। सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह संबंधित ठेकेदारों को भुगतान कर दिया जाएगा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा के तहत जिला मुख्यालय पर ढाई करोड़ रुपए से पांच अत्याधुनिक शौचालय बनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेशों की पालना में नगर परिषद ने मुख्य बस स्टैण्ड से, इंदिरा वाटिका में नगर परिषद परिसर, वार्ड नंबर 46 और वार्ड नंबर पांच में अत्याधुनिक शौचालय निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया चलाई। निविदा में प्रत्येक कार्य की अनुमानित लागत 50 लाख
रुपए बताई गई। निविदा प्रक्रिया पूरी होने पर वार्ड नंबर पांच को छोड़कर बाकी चार स्थानों पर शौचालय निर्माण के कार्यादेश संबंधी ठेकेदार फर्मों को जारी कर दिए गए। इन आदेशों में निर्माण कार्य दिसम्बर 2018 में पूरा करने की शर्त शामिल थी।
सूत्रों के अनुसार इस बीच विधानसभा चुनाव आचारसंहिता लगने के साथ ही ठेकेदारों ने शौचालयों का निर्माण कार्य बंद कर दिया। अब अधूरे काम के ही बिल बनाकर भुगतान की जुगत लगाई गई है।
सशर्त होगा भुगतान
इस मामले में सभापति अजय चाण्डक का कहना है कि अत्याधुनिक शौचालयों के निर्माण कार्य के चलते ठेकेदारों को पार्ट पेमेंट का भुगतान किया जा सकता है। नियमानुसार ही भुगतान की कार्यवाही की जा रही है। इस बार ठेकेदारों को इस शर्त पर भुगतान किया जा रहा है कि वे भुगतान होने के बाद अधूरे शौचालयों का निर्माण पूरा करवाएंगे। यदि ठेकेदारों ने शर्त की पालना नहीं की तो उन्हें भविष्य के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।

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