मोदी सरकार में बिहार के चारों केंद्रीय मंत्रियों का टिकट खतरे में
बिहार। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी दलों से कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा ये गणित भले ही सुलझा लिया हो लेकिन किस पार्टी के खाते में कौन सी सीट जाएगी इसका गणित नहीं सुलझ रहा है, दरअसल पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को सिर्फ 10 सीटें दीं थीं। पार्टी अकेले 30 सीटों पर चुनाव लड़ी जिसमें उसे 22 सीटों पर जीत मिली लेकिन इस बार पार्टी के खाते में सिर्फ 17 सीटें आई हैं। ऐसे में उसे अपने 5 सीटिंग सांसदों का टिकट काटना पड़ रहा है। इसमें बेगुसराय के सांसद भोला सिंह की मौत हो चुकी है और दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद और पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पहले ही पार्टी से बगावत का रास्ता चुन चुके हैं फिर भी पार्टी को 2 सीटिंग सांसदों का टिकट काटना पड़ेगा जो शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती है। बीजेपी नेतृत्व के लिए सिर्फ 5 सांसदों का टिकट काटना ही चुनौती नहीं है इससे बड़ी चुनौती है बिहार से अपने चारों केंद्रीय मंत्रियों की वर्तमान सीट बचाना। गठबंधन के सहयोगी दलों ने 2014 के लोकसभा में जीतकर आए चारों मंत्रियों की सीट पर अपना दावा ठोक दिया है। ऐसे में पार्टी के सामने संकट है कि इनकी सीटिंग सीट कैसे बचाएं और अगर सीटिंग सीट सहयोगी के पाले में जाती है तो इन नेताओं को कहां से चुनाव लड़ाया जाए

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