होली पर बन रहे इस बार दुर्लभ संयोग
- देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में मनाया जाएगा रंगों का त्योहार
श्रीगंगानगर। सात साल बाद होली पर्व पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव मेंं रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। होलिका दहन पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में होगा। यह शुक्र का नक्षत्र है। इसलिए सूर्य के साथ शुक्र नक्षत्र का भी सकारात्मक फल प्राप्त होगा। शुक्र नक्षत्र जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। इस योग में होलिका दहन और पूजन करने वालों का अनिष्ट नहीं होगा। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि होली पर्व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार को मनाया जाएगा। सात साल बाद यह मौका आ रहा है, जब देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में होली गुरुवार को मनाई जाएगी। इस योग से मान-सम्मान व पारिवारिक शुभ फल की प्राप्ति होगी। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि इस बार भी 21 मार्च को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में होली मनाई जाएगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्म सम्मान, उन्नति, प्रकाशि आदि का कारक है। जब सभी ग्रह सात स्थानों पर होते हैं, वीणा योग का संयोग बनता है। इससे गायन-वादन व नृत्य में निपुणता आती है। उन्होंने बताया कि इस बार बीस मार्च को रात नौ बजे तक भद्रा काल रहेगा, इसलिए होलिका दहन रात 9 बजे के बाद ही किया जा सकेगा।
श्रीगंगानगर। सात साल बाद होली पर्व पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव मेंं रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। होलिका दहन पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में होगा। यह शुक्र का नक्षत्र है। इसलिए सूर्य के साथ शुक्र नक्षत्र का भी सकारात्मक फल प्राप्त होगा। शुक्र नक्षत्र जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। इस योग में होलिका दहन और पूजन करने वालों का अनिष्ट नहीं होगा। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि होली पर्व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार को मनाया जाएगा। सात साल बाद यह मौका आ रहा है, जब देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में होली गुरुवार को मनाई जाएगी। इस योग से मान-सम्मान व पारिवारिक शुभ फल की प्राप्ति होगी। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि इस बार भी 21 मार्च को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में होली मनाई जाएगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्म सम्मान, उन्नति, प्रकाशि आदि का कारक है। जब सभी ग्रह सात स्थानों पर होते हैं, वीणा योग का संयोग बनता है। इससे गायन-वादन व नृत्य में निपुणता आती है। उन्होंने बताया कि इस बार बीस मार्च को रात नौ बजे तक भद्रा काल रहेगा, इसलिए होलिका दहन रात 9 बजे के बाद ही किया जा सकेगा।

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