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कौनसा मुद्दा रहेगा भारी, स्थिति स्पष्ट होगी सारी

- श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र कुछ मायने में अलग, प्रत्याशियों को देना होगा जनता को जवाब
श्रीगंगानगर। पाकिस्तान की सीमा से सटे श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में कौनसा मुद्दा सबसे भारी रहेगा? सवाल का जवाब जल्दी मिलने लगेगा और स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। प्रमुख राजनीतिक दलों की टिकट फाइनल होने के बाद जैसे ही चुनावी माहौल गरमाएगा और लोगों के बीच जाएंगे तो पता चलने लग जाएगा कि कौन प्रत्याशी प्रसन्नता महसूस कर रहा है और किनके पसीने छूट रहे हैं। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आएगा, सब कुछ सामने आता जाएगा कि आम मतदाता ने किस मुद्दे को खास माना है और किसको नहीं।
श्रीगंगानगर क्षेत्र कई मायने में देश के बाकि संसदीय क्षेत्रों से अलग है। पूरी तरह कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस इलाके में नहरी पानी, सरकारी मेडीकल कॉलेज, कृषि जिन्सों की सरकारी खरीद जैसे अनेक मुद्दे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा का होने के कारण गत दिनों पाकिस्तान से बढ़ी तनातनी भी इस संसदीय क्षेत्र में वोट के रुझान को कुछ न कुछ जरूर प्रभावित करेगी।
केंद्र एवं राज्य सरकार के कामकाज, प्रत्याशी की छवि, प्रत्याशियों के प्रमुख समर्थकों के स्थानीय सम्पर्क आदि की यह परीक्षा की घड़ी है। कई बार ऐन वक्त पर मुद्दों में बदलाव भी हो जाता है।
पुरानी बातें गौण हो जाती है और सामने आने वाली नई बात की बयार में मतदाता बह जाते हैं। कुल मिला कर यह वही 'घड़ीÓ है जिसकी तरफ टकटकी लगी रहती है। लोकतंत्र में मतदान को सबसे बड़ा अधिकार और 'हथियारÓ माना गया है। मतदाता किसके पक्ष में सबसे अधिक मत डालेंगे और बाकियों को कितना और कैसे नकारेंगे जैसी स्थिति भी वोटों की गिनती के समय साफ हो जाएगी।
ये हैं प्रमुख मुद्दे
- नहरी पानी की कमी।
- नहरों में आता दूषित जल।
- सरकारी मेडीकल कॉलेज।
- कृषि जिन्सों की सरकारी खरीद।
- सीवरेज कार्य की मंथर गति।
- शहरी क्षेत्र में खस्ता हाल सड़कें।


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