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पहले पिता, फिर मां और अब पुत्र ने की आत्महत्या

- चार दिन से घर में लटक रहा था शव
लालगढज़ाटान। पहले पिता, फिर मां और अब पुत्र ने आत्महत्या करके जान दे दी। युवक की लाश पिछले चार दिन से घर में फंदे से लटक रही थी। बार-बार फोन करने पर सम्पर्क नहीं से परेशान बहनें जब घर पहुंची, तो भाई के शव को लटकता पाया। पुलिस ने शव को सरकारी अस्पताल में पहुंचा दिया है।
पुलिस के अनुसार मृतक 22 वर्षीय सुशील वर्मा पुत्र रामजीलाल वर्मा निवासी वार्ड नम्बर 18 था। सुशील वर्मा की सादुलशहर पंचायत समिति में चतुर्थ श्रेर्णी कर्मचारी था। चार दिन से वह ड्यूटी पर नहीं गया। उसकी दो बहनें जो शादीशुदा हैं। वह उससे लगातार फोन कर रही थी, लेकिन चार दिन से फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में घबराई दोनों बहनें ससुराल से अपने भाई के घर पहुंची। मुख्य गेट पर अंदर से ताला लगा हुआ था। वह किसी तरह से अंदर पहुंची, तो कमरा भी अंदर से बंद था। बहनों ने खिड़की से देखा, तो फंदे से झूलती लाश देख कर उनकी रूलाई फूट पड़ी। शोर मचने पर पूर्व सरपंच मोहनलाल व चुन्नीराम वर्मा, पूर्व उप सरपंच ओमप्रकाश भी वहां पहुंच गये। ग्रामीणों की सूचना पर एएसआई राजेन्द्र मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को नीचे उतारा और सरकारी अस्पताल में पहुंचाया। सुशील वर्मा ने रस्सी से फंदा लगाया था।
पुलिस के अनुसार सुशील वर्मा की शर्ट की जेब में मोबाइल फोन था। मोबाइल के ईयर फोन हाथ में थे। आत्महत्या के कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुए हैं। कमरे की तलाशी में अभी तक सुसाइड नोट नहीं मिला है। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि तीन वर्ष पूर्व सुशील वर्मा के पिता ने भी नहर में कूद कर आत्महत्या कर ली थी।
दो वर्ष पूर्व सुशील वर्मा की मां ने फांसी लगा कर जान दे दी थी। सुशील की दो बहनों की शादी होने पर वह ससुराल में रहती थी। खुद अविवाहित था। पिता की मौत के बाद सुशील अनुकंपा पर सादुलशहर पंचायत समिति में चतुर्थ श्रेर्णी कर्मचारी की नौकरी लग गया था। समाचार लिखे जाने तक पुलिस शव का पोस्टमार्टम करवा रही थी। इसके बाद मर्ग दर्ज की जायेगी।
एक वर्ष में चार बार तबादला
लालगढ़ जाटान। सादुलशहर पंचायत समिति में चतुर्थ श्रेर्णी कर्मचारी सुशील वर्मा द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद उसका बार-बार तबादला होने भी मानसिक प्रताडऩा का बड़ा कारण माना जा रहा है।
उसकी बहनों ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व भाई सुशील वर्मा नौकरी लगा था। इसके बाद लालगढ़ उसका तबादला कर दिया। कुछ महीनों बाद उसे श्रीगंगानगर स्थानान्तरित कर दिया गया।
इसके बाद श्रीगंगानगर से वापिस सादुलशहर तबादला कर दिया। बार-बार तबादला होने पर मेरा भाई मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था।


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