भाजपाइयो सावधान! कहीं झालावाड़ से उठी चिंगारी श्रीगंगानगर मेंं आग न बन जाए
- झालावाड़ मेंं 'वसुंधरा वापस जाओÓ, 'वसुंधरा झालावाड़ छोड़ोÓ के नारे
श्रीगंगानगर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपने ही विधानसभा क्षेत्र झालावाड़ में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा है। झालावाड़ मेंं जिस प्रकार 'वसुंधरा वापस जाओÓ, 'वसुंधरा झालावाड़ छोड़ोÓ के नारे लगे, उससे भाजपा में चिंता की लहर दौड़ गई है। यह नारे कांग्रेसियों ने नहीं, अपनी उपेक्षा से आहत भाजपा के कार्यकर्ताओं के ही एक वर्ग ने लगाए। झालावाड़ मेंं जो कुछ हुआ है, उससे श्रीगंगानगर के भाजपा नेताओं को सावधान होने की जरूरत है। कहीं ऐसा न हो श्रीगंगानगर के कार्यकर्ता भी झालावाड़ वालों का अनुसरण करते नजर आएं।
श्रीगंगानगर जिले में पिछले साढ़े चार साल से लोग हताश और निराश हैं। एक ओर जहां भाजपा के विधायक और नेता मनमानी करते आ रहे हैं, वहीं आम कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा के कारण आक्रोशित हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की आम शिकायत रही है कि एमएलए उनकी सुनते नहीं और अधिकारी उन्हें गांठते नहीं। विकास कार्यों की अनदेखी और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस की बातें कई बार भाजपा की बैठकों मेंं उठी हैं मगर लगता नहीं कि किसी ने इससे सबक लिया हो। जिले के किसान भाजपा सरकार से बुरी तरह हताश हैं।
आम जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ जिले में भाजपा को वोट दिए थे मगर सभी उम्मीदें धूलधूसरित हो गईं। जिले के दूरदराज के इलाकों को तो छोड़ें, जिला मुख्यालय के मतदाता भी अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मंत्री और एमएलए को जनता के बीच आते नहीं। ऐसे मेंं लोगों की जली-कटी पार्टी कार्यकर्ताओं को सुननी पड़ती रही है। राजनीतिक नियुक्तियों में भी आम कार्यकर्ता की अनदेखी कर दी गई।
छोटे से लेकर बड़े ओहदों पर नेताओं ने अपने चहेतों को बैठा दिया। पंजाबी भाषा अकादमी के अध्यक्ष पद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना के समधि रवि सेतिया की नियुक्ति ताजा उदाहरण है। सेतिया की नियुक्ति ने आग में घी डालने जैसा काम किया है।
जिस प्रकार का वातावरण भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच है, उससे असंतोष की ज्वाला फूटने से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर श्रीगंगानगर के कार्यकर्ता झालावाड़ को दोहरा दें तो कौनसी बड़ी बात है। झालावाड़ मेंं भाजपा कार्यकर्ता प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन के वर्षगांठ के मौके पर झालावाड़ में पार्टी कार्यकर्ताओं ने बाइक रैली निकाली। इस रैली में कार्यकर्ताओं ने तख्ती थाम रखी थी जिस पर 'वसुंधरा वापस जाओÓ, 'वसुंधरा झालावाड़ छोड़ोÓ लिखा हुआ था। इस रैली में एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ता 500 मोटरसाइकिल से झालावाड़ और इसके पड़ोसी क्षेत्र झालरापाटन शहरों के बाजारों से गुजरे। ये कार्यकर्ता भ्रष्टाचार और झालावाड़ में विकास कार्य नहीं होने को लेकर विरोध कर रहे थे।
हालांकि झालावाड़ भाजपा जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के तौर पर वसुंधरा राजे के कार्यकाल में झालावाड़ में विकास के काफी काम किए गए हैं लेकिन आम कार्यकर्ता इससे संतुष्ट होंगे या नहीं, कह पाना मुश्किल है। कुल मिलाकर जो चिंगारी झालावाड़ से भड़की है, वह श्रीगंगानगर जैसे उपेक्षित इलाकों में अग्नि बनकर फैल सकती है।
श्रीगंगानगर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपने ही विधानसभा क्षेत्र झालावाड़ में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा है। झालावाड़ मेंं जिस प्रकार 'वसुंधरा वापस जाओÓ, 'वसुंधरा झालावाड़ छोड़ोÓ के नारे लगे, उससे भाजपा में चिंता की लहर दौड़ गई है। यह नारे कांग्रेसियों ने नहीं, अपनी उपेक्षा से आहत भाजपा के कार्यकर्ताओं के ही एक वर्ग ने लगाए। झालावाड़ मेंं जो कुछ हुआ है, उससे श्रीगंगानगर के भाजपा नेताओं को सावधान होने की जरूरत है। कहीं ऐसा न हो श्रीगंगानगर के कार्यकर्ता भी झालावाड़ वालों का अनुसरण करते नजर आएं।
श्रीगंगानगर जिले में पिछले साढ़े चार साल से लोग हताश और निराश हैं। एक ओर जहां भाजपा के विधायक और नेता मनमानी करते आ रहे हैं, वहीं आम कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा के कारण आक्रोशित हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की आम शिकायत रही है कि एमएलए उनकी सुनते नहीं और अधिकारी उन्हें गांठते नहीं। विकास कार्यों की अनदेखी और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस की बातें कई बार भाजपा की बैठकों मेंं उठी हैं मगर लगता नहीं कि किसी ने इससे सबक लिया हो। जिले के किसान भाजपा सरकार से बुरी तरह हताश हैं।
आम जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ जिले में भाजपा को वोट दिए थे मगर सभी उम्मीदें धूलधूसरित हो गईं। जिले के दूरदराज के इलाकों को तो छोड़ें, जिला मुख्यालय के मतदाता भी अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मंत्री और एमएलए को जनता के बीच आते नहीं। ऐसे मेंं लोगों की जली-कटी पार्टी कार्यकर्ताओं को सुननी पड़ती रही है। राजनीतिक नियुक्तियों में भी आम कार्यकर्ता की अनदेखी कर दी गई।
छोटे से लेकर बड़े ओहदों पर नेताओं ने अपने चहेतों को बैठा दिया। पंजाबी भाषा अकादमी के अध्यक्ष पद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना के समधि रवि सेतिया की नियुक्ति ताजा उदाहरण है। सेतिया की नियुक्ति ने आग में घी डालने जैसा काम किया है।
जिस प्रकार का वातावरण भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच है, उससे असंतोष की ज्वाला फूटने से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर श्रीगंगानगर के कार्यकर्ता झालावाड़ को दोहरा दें तो कौनसी बड़ी बात है। झालावाड़ मेंं भाजपा कार्यकर्ता प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन के वर्षगांठ के मौके पर झालावाड़ में पार्टी कार्यकर्ताओं ने बाइक रैली निकाली। इस रैली में कार्यकर्ताओं ने तख्ती थाम रखी थी जिस पर 'वसुंधरा वापस जाओÓ, 'वसुंधरा झालावाड़ छोड़ोÓ लिखा हुआ था। इस रैली में एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ता 500 मोटरसाइकिल से झालावाड़ और इसके पड़ोसी क्षेत्र झालरापाटन शहरों के बाजारों से गुजरे। ये कार्यकर्ता भ्रष्टाचार और झालावाड़ में विकास कार्य नहीं होने को लेकर विरोध कर रहे थे।
हालांकि झालावाड़ भाजपा जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के तौर पर वसुंधरा राजे के कार्यकाल में झालावाड़ में विकास के काफी काम किए गए हैं लेकिन आम कार्यकर्ता इससे संतुष्ट होंगे या नहीं, कह पाना मुश्किल है। कुल मिलाकर जो चिंगारी झालावाड़ से भड़की है, वह श्रीगंगानगर जैसे उपेक्षित इलाकों में अग्नि बनकर फैल सकती है।
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