हद हो गई! आंखों की जांच वाली
- मशीन से भी लिंग परीक्षण
- इस वजह से अब बी-स्कैन मशीन का भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्टेशन जरूरी
श्रीगंगानगर। एक मशीन है जिसका नाम है बी-स्कैन। यह काम आंखों की जांच करने के काम आती है मगर लालच और नीचता की हद देखिए। अब इस मशीन का इस्तेमाल भी गर्भ मेंं पल रहे शिशु का लिंग परीक्षण किया जाने लगा है। ऐसे मामले सामने आने के कारण राज्य सरकार ने अब बी-स्कैन मशीन का रजिस्टे्रशन भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत करने के आदेश दे दिए हैं।
चिकित्सा विभाग को मिली जानकारी के अनुसार भू्रण परीक्षण के लिए चोरी छिपे बी स्कैन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीकानेर और महाराष्ट्र के पुणे में ऐसे मामले पकड़े गए हैं। इसके आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सैल में सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में इस्तेमाल की जाने वाली बी स्कैन मशीनों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पीसीपीएनडीटी के नई दिल्ली स्थित सेंटल सुपरवाइजरी बोर्ड की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश के सभी राज्यों को मशीन का रजिस्ट्रेशन करवाने व एक्टिव टै्रकर लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कन्या भू्रण हत्या रोकने एवं परीक्षण पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।
दरअसल, चिकित्सा विभाग ने विशेषज्ञों से जांच-पड़ताल कराई तो साफ हो गया कि बी-स्कैन मशीन में प्रॉब बदलकर भ्रूण लिंग की जांच संभव है। प्रॉब मशीन का वह हिस्सा होता है जिससे जांच होती है। इसका साइज बदलने से भ्रूण का लिंग परीक्षण भी हो सकता है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सेल में सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में इस्तेमाल की जाने वाली 'बी-स्कैन मशीनÓ को पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेते हुए इस मशीन का भी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पशु चिकित्सालय की सोनोग्राफी पर भी विभाग की मॉनिटरिंग की जाएगी।
इनका कहना है
इस बारे में अभी आदेशों की जानकारी नहीं है लेकिन जैसे ही आदेश प्राप्त होंगे तो सरकार की भावना के अनुरूप आदेशों की अक्षरश: पालना करवाई जाएगी।
-डॉ. नरेश बंसल,
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्रीगंगानगर।
मशीनों का करवाना होगा पंजीकरण
सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों को इन मशीनों का पंजीयन कराने के लिए कहा जाएगा। पंजीकरण नहीं करवाने वाले संस्थानों पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा इको कार्डियोलॉजी व यूरोलॉजी विभाग की मशीनें, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत अन्य भ्रूण जांच कर सकने वाली मशीनों को भी पंजीकृत किया जाएगा।
- इस वजह से अब बी-स्कैन मशीन का भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्टेशन जरूरी
श्रीगंगानगर। एक मशीन है जिसका नाम है बी-स्कैन। यह काम आंखों की जांच करने के काम आती है मगर लालच और नीचता की हद देखिए। अब इस मशीन का इस्तेमाल भी गर्भ मेंं पल रहे शिशु का लिंग परीक्षण किया जाने लगा है। ऐसे मामले सामने आने के कारण राज्य सरकार ने अब बी-स्कैन मशीन का रजिस्टे्रशन भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत करने के आदेश दे दिए हैं।
चिकित्सा विभाग को मिली जानकारी के अनुसार भू्रण परीक्षण के लिए चोरी छिपे बी स्कैन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीकानेर और महाराष्ट्र के पुणे में ऐसे मामले पकड़े गए हैं। इसके आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सैल में सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में इस्तेमाल की जाने वाली बी स्कैन मशीनों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पीसीपीएनडीटी के नई दिल्ली स्थित सेंटल सुपरवाइजरी बोर्ड की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश के सभी राज्यों को मशीन का रजिस्ट्रेशन करवाने व एक्टिव टै्रकर लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कन्या भू्रण हत्या रोकने एवं परीक्षण पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।
दरअसल, चिकित्सा विभाग ने विशेषज्ञों से जांच-पड़ताल कराई तो साफ हो गया कि बी-स्कैन मशीन में प्रॉब बदलकर भ्रूण लिंग की जांच संभव है। प्रॉब मशीन का वह हिस्सा होता है जिससे जांच होती है। इसका साइज बदलने से भ्रूण का लिंग परीक्षण भी हो सकता है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सेल में सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में इस्तेमाल की जाने वाली 'बी-स्कैन मशीनÓ को पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेते हुए इस मशीन का भी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पशु चिकित्सालय की सोनोग्राफी पर भी विभाग की मॉनिटरिंग की जाएगी।
इनका कहना है
इस बारे में अभी आदेशों की जानकारी नहीं है लेकिन जैसे ही आदेश प्राप्त होंगे तो सरकार की भावना के अनुरूप आदेशों की अक्षरश: पालना करवाई जाएगी।
-डॉ. नरेश बंसल,
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्रीगंगानगर।
मशीनों का करवाना होगा पंजीकरण
सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों को इन मशीनों का पंजीयन कराने के लिए कहा जाएगा। पंजीकरण नहीं करवाने वाले संस्थानों पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा इको कार्डियोलॉजी व यूरोलॉजी विभाग की मशीनें, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत अन्य भ्रूण जांच कर सकने वाली मशीनों को भी पंजीकृत किया जाएगा।
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