अबोहर इलाके से आया था गैंगस्टर अंकित भादू
चूक न होती, तो सरेंडर कर देता इनामी अपराधी
श्रीगंगानगर। सादुलशहर इलाके में हरियाणा व श्रीगंगानगर पुलिस के हाथ से फिसला गैंगस्टर व इनामी अपराधी अंकित भादू अबोहर इलाके में कई दिनों से छिपा हुआ था। वह पंजाब इलाके से ही कार में सवार होकर सादुलशहर इलाके में पहुंचा था, लेकिन वह पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार होने में कामयाब हो गया था। इस घटनाक्रम में अगर हरियाणा पुलिस का कमांडो जल्दबाजी नहीं करता, तो भादू आत्मसमर्पण कर देता।
जानकारी के अनुसार अंकित भादू के सादुलशहर इलाके में आने की सूचना पंचकूला की एसओजी टीम को मिली थी।
यह टीम अकेले ही अंकित भादू को पकडऩे की चाहत में सादुलशहर पहुंची थी, लेकिन जब पार नहीं पड़ी, तो पंचकूला पुलिस ने श्रीगंगानगर पुलिस के सीआई नरेन्द्र पूनियां को सूचना दी। इसके बाद श्रीगंगानगर पुलिस अलर्ट हुई थी। श्रीगंगानगर व पंचकूला पुलिस ने अंकित भादू को पकडऩे के लिए घेराबंदी कर ली थी, लेकिन ऐन वक्त पर हरियाणा पुलिस के एक कमांडो ने अंकित भादू पर गोली दाग दी, जिससे सारा मामला बिगड़ गया।
अंकित भादू खुद को चारों तरफ से घिर जाने के बाद एक बारगी सरेंडर करने को तैयार हो गया था, लेकिन हरियाणा पुलिस के एक कमांडो ने उस पर गोली दाग दी, जिससे अंकित भादू को लगा कि आज उसका एनकाउंटर होगा। उसने खुद की जान को जोखिम में डालते देख कर पुलिस पर फायरिंग कर डाली। बस यहीं चूक हो गई।
अंकित भादू करो, या मरो, की नीति अपनाते हुए फायरिंग करता हुआ निकल गया।
पुलिस के सामने अंकित भादू था, लेकिन वह अंधाधुंध फायरिंग कर रहा था। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को गोली की मारक क्षमता से बाहर रह कर दूरी बनानी पड़ी। श्रीगंगानगर पुलिस के सीआई नरेन्द्र पूनियां की तरह अगर हरियाणा पुलिस के अफसर जल्दबाजी नहीं करते और सूझबूझ से काम लेते तो अंकित भादू आत्मसमर्पण कर देता।
श्रीगंगानगर। सादुलशहर इलाके में हरियाणा व श्रीगंगानगर पुलिस के हाथ से फिसला गैंगस्टर व इनामी अपराधी अंकित भादू अबोहर इलाके में कई दिनों से छिपा हुआ था। वह पंजाब इलाके से ही कार में सवार होकर सादुलशहर इलाके में पहुंचा था, लेकिन वह पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार होने में कामयाब हो गया था। इस घटनाक्रम में अगर हरियाणा पुलिस का कमांडो जल्दबाजी नहीं करता, तो भादू आत्मसमर्पण कर देता।
जानकारी के अनुसार अंकित भादू के सादुलशहर इलाके में आने की सूचना पंचकूला की एसओजी टीम को मिली थी।
यह टीम अकेले ही अंकित भादू को पकडऩे की चाहत में सादुलशहर पहुंची थी, लेकिन जब पार नहीं पड़ी, तो पंचकूला पुलिस ने श्रीगंगानगर पुलिस के सीआई नरेन्द्र पूनियां को सूचना दी। इसके बाद श्रीगंगानगर पुलिस अलर्ट हुई थी। श्रीगंगानगर व पंचकूला पुलिस ने अंकित भादू को पकडऩे के लिए घेराबंदी कर ली थी, लेकिन ऐन वक्त पर हरियाणा पुलिस के एक कमांडो ने अंकित भादू पर गोली दाग दी, जिससे सारा मामला बिगड़ गया।
अंकित भादू खुद को चारों तरफ से घिर जाने के बाद एक बारगी सरेंडर करने को तैयार हो गया था, लेकिन हरियाणा पुलिस के एक कमांडो ने उस पर गोली दाग दी, जिससे अंकित भादू को लगा कि आज उसका एनकाउंटर होगा। उसने खुद की जान को जोखिम में डालते देख कर पुलिस पर फायरिंग कर डाली। बस यहीं चूक हो गई।
अंकित भादू करो, या मरो, की नीति अपनाते हुए फायरिंग करता हुआ निकल गया।
पुलिस के सामने अंकित भादू था, लेकिन वह अंधाधुंध फायरिंग कर रहा था। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को गोली की मारक क्षमता से बाहर रह कर दूरी बनानी पड़ी। श्रीगंगानगर पुलिस के सीआई नरेन्द्र पूनियां की तरह अगर हरियाणा पुलिस के अफसर जल्दबाजी नहीं करते और सूझबूझ से काम लेते तो अंकित भादू आत्मसमर्पण कर देता।
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