नहरों में दूषित पानी आना जारी, अधिकारी पहुंचे पंजाब
श्रीगंगानगर। इन्दिरा गांधी, भाखड़ा नहरों में 25 मार्च से बंदी लेने के बाद गंगनहर में दूषित पानी आने का क्रम बना हुआ है। पंजाब के कैमिकल फैक्ट्रियों व सीवरेज युक्त पानी सतलुज नदी में मिलाया जाता है और यहीं से यह पानी हरिकेबैराज होता हुआ गंगनहर के जरिए राजस्थान में पहुंचता है। दोनों नहरों की बंदी होने से अब अकेले गंगनहर में इस दूषित पानी की मात्रा बढ़ चुकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पंजाब पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
उनका कहना है कि इन्दिरा गांधी और भाखड़ा में बंदी के चलते हुए जो रूका हुआ पानी था, वह लगातार दो-तीन दिन तक आया है, जिसे अब बंद करवा दिया गया है।
पंजाब के अधिकारियों को भी इस मामले में सतर्कता बरतने को कहा गया है। इसके विपरीत किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल व अमरसिंह बिश्रोई ने बताया कि नहर में पानी कम होते ही प्रदूषित पानी का असर स्पष्ट देखा जा सकता है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे इस पानी का वाटरवक्र्स की डिग्गियों में स्टोरेज न करवाएं क्योंकि इस केमिकल युक्त पानी को पीने से गंभीर बीमारियां लोगों को पहले से ही हो रही हैं, जिसकी बढऩे की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में जिला कलेक्टर को भी वस्तुस्थिति से अवगत करवा कर पानी बंद करवाया जाएगा।
उनका कहना है कि इन्दिरा गांधी और भाखड़ा में बंदी के चलते हुए जो रूका हुआ पानी था, वह लगातार दो-तीन दिन तक आया है, जिसे अब बंद करवा दिया गया है।
पंजाब के अधिकारियों को भी इस मामले में सतर्कता बरतने को कहा गया है। इसके विपरीत किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल व अमरसिंह बिश्रोई ने बताया कि नहर में पानी कम होते ही प्रदूषित पानी का असर स्पष्ट देखा जा सकता है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे इस पानी का वाटरवक्र्स की डिग्गियों में स्टोरेज न करवाएं क्योंकि इस केमिकल युक्त पानी को पीने से गंभीर बीमारियां लोगों को पहले से ही हो रही हैं, जिसकी बढऩे की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में जिला कलेक्टर को भी वस्तुस्थिति से अवगत करवा कर पानी बंद करवाया जाएगा।

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