भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव 13 अप्रैल को
- पुष्य नक्षत्र और वेशी योग के संयोग में मनाई जाएगी रामनवमी
श्रीगंगानगर। इस बार रामनवमी का पर्व 13 अप्रैल शनिवार को पुष्य नक्षत्र और वेशी योग के संयोग में मनाया जाएगा। कई सालों के बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र में रामनवमी आने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार नवमी तिथि तेरह अप्रेल को पड़ रही है। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि नवमी तिथि तेरह अप्रेल को दोपहर 11.45 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन चौदह अप्रेल को सुबह 9.40 बजे तक रहेगी। चूंकि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र व कर्क लग्न में मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए रामनवमी पर्व तेरह अप्रेल को ही मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रे रखने वाले श्रद्धालु रामनवमी के दिन कन्या पूजन, हवन और पुष्पांजलि करेंगे। इस दिन भगवान श्रीराम और हनुमानजी की आराधना करने से लोगों को मानसिक शांति, मनोबल में वृद्धि, संबंधों में मधुरता तथा प्रगति के अवसरों की प्राप्ति के साथ-साथ शनि की ढैया तथा साढ़ेसाती से प्रभावित जातकों को अनुकूलता प्राप्त होगी। शनिदेव की कृपा पाने के लिए राम नवमी का दिन श्रेष्ठ माना गया र्है।
पंडित पाराशर ने बताया कि इस बार रामनवमी पर वेशी योग बन रहा है। यह योग तब बनता है जब सूर्य से द्वादश भाव में चंद्रमा को छोड़कर दूसरा शुभ ग्रह हो। इस बार रामनवमी के अवसर पर सूर्य से द्वादश भाव में शुक्र है। रामनवमी के दिन शनिदेव के नक्षत्र पुष्य का होना विशेष शुभकारी रहेगा। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना और व्रत करने से शुभ फल प्राप्त होगा।
श्रीगंगानगर। इस बार रामनवमी का पर्व 13 अप्रैल शनिवार को पुष्य नक्षत्र और वेशी योग के संयोग में मनाया जाएगा। कई सालों के बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र में रामनवमी आने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार नवमी तिथि तेरह अप्रेल को पड़ रही है। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि नवमी तिथि तेरह अप्रेल को दोपहर 11.45 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन चौदह अप्रेल को सुबह 9.40 बजे तक रहेगी। चूंकि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र व कर्क लग्न में मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए रामनवमी पर्व तेरह अप्रेल को ही मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रे रखने वाले श्रद्धालु रामनवमी के दिन कन्या पूजन, हवन और पुष्पांजलि करेंगे। इस दिन भगवान श्रीराम और हनुमानजी की आराधना करने से लोगों को मानसिक शांति, मनोबल में वृद्धि, संबंधों में मधुरता तथा प्रगति के अवसरों की प्राप्ति के साथ-साथ शनि की ढैया तथा साढ़ेसाती से प्रभावित जातकों को अनुकूलता प्राप्त होगी। शनिदेव की कृपा पाने के लिए राम नवमी का दिन श्रेष्ठ माना गया र्है।
पंडित पाराशर ने बताया कि इस बार रामनवमी पर वेशी योग बन रहा है। यह योग तब बनता है जब सूर्य से द्वादश भाव में चंद्रमा को छोड़कर दूसरा शुभ ग्रह हो। इस बार रामनवमी के अवसर पर सूर्य से द्वादश भाव में शुक्र है। रामनवमी के दिन शनिदेव के नक्षत्र पुष्य का होना विशेष शुभकारी रहेगा। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना और व्रत करने से शुभ फल प्राप्त होगा।

No comments