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गौड़ साहब! सरकार से वह सब मांगो, जिससे शहर 5 साल वंचित रहा है

नई सरकार बनने पर समस्याएं घटी नहीं, बल्कि बढ़ गई हैं
श्रीगंगानगर। राज्य में नई सरकार बने तीन महीने हो गए हैं लेकिन शहर में  लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कोई विकास, कोई नया काम अथवा समस्याओं का समाधान करने की दिशा में कोई कदम उठाया गया हो, ऐसा नहीं लग रहा है। शहर के लोग इन कामों के लिए निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ की ओर ताक रहे हैं। गौड़ लोकसभा चुनाव के बाद विकास का पहिया घूमने की बात कह रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि जब काम लोकसभा चुनाव के बाद होंगे तो शहर के लोग चुनाव में मतदान करने के लिए किस आधार पर पार्टी अथवा उम्मीदवार का चयन करें?
पिछले पांच साल तक शहर ने जिस तरह सरकारी उपेक्षा और उदासीनता का दंश झेला है, वैसा इससे पहले कभी नहीं झेला। विकास के काम अवरुद्ध हैं। समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पनपी समस्याएं जस की तस हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है लेकिन शहर के लोगों की किस्मत में कोई बदलाव नहीं आया है।
उल्टे कुछ समस्याओं में इजाफा हो गया है। नौ साल बाद नींद से जागा श्रम विभाग शहरवासियों से उप कर वसूलने पर आमादा है।
शहर में सूदखारों ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हैं। नई सरकार बनने पर पुरानी समस्याओं का खात्मा होने की उम्मीद थी लेकिन इसके विपरीत समस्याओं में बढ़ोतरी होने लगी है। शहर के लोगों ने राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की भीड़ में से राजकुमार गौड़ पर विश्वास व्यक्त किया है। अब राजकुमार गौड़ की जिम्मेदारी है कि वे उन अपेक्षाओं पर खरे उतरें, जो उन्हें वोट देते समय आम जनता ने उनसे की थीं।
विधायक गौड़ का दावा है कि उन्होंने इलाके की तमाम समस्याओं और जरूरतों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अवगत कराया है। सीएम इसके प्रति गंभीर हैं लेकिन विकास के काम यथार्थ के धरातल पर लोकसभा चुनाव के बाद ही नजर आएंगे। यानी विधानसभा चुनाव के दौरान आम जनता ने जिस प्रकार आश्वासनों के लॉलीपॉप चूसे, वैसे ही लॉलीपॉप लोकसभा चुनाव में भी लोगों को थमा दिए जाएंगे। चुनावी आचार संहिता लगने  वाली है और स्वाभाविक है आचार संहिता के दौरान कामकाज की रफ्तार सुस्त हो जाएगी लेकिन आचार संहिता के उपरांत जनता की उम्मीदें पूरी हों, यह जिम्मेदारी विधायक गौड़ की है।
विधायक गौड़ की सीएम गहलोत से नजदीकी किसी से छिपी हुई नहीं है। विजयी होने के बाद गौड़ ने कांग्रेस सरकार को समर्थन भी दे दिया है। इस समर्थन के बदले में गौड़ को शहर के लिए वह सब कुछ सरकार से मांगना चाहिए, जिससे शहर पिछले पांच साल तक वंचित रहा है। इसके लिए उन्हें सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना ही होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो हो सकता है कल को वे भी निवर्तमान विधायक की तरह यह कहते हुए नजर आएं कि सरकार हमारी नहीं सुनती।


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