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क्या आप भी अंगदान करना चाहते हैं?

अंगदान दान किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता करना है, जिसे उस अंग की जरूरत हो। अंगदान से दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है। कोई भी व्यक्ति अंगदान कर कई जिंदगयिों को बचा सकता है। विश्व अंगदान दिवस के मौके पर हम आपको इस लेख के जरिए अंगदान से जुड़ी कुछ अहम जानकारी दे रहे हैं। अगर आप अंगदान के प्रति कोई भ्रम है तो यह लेख निश्चित रूप से आपके लिए है।
अंगदान के प्रकार
यह दो प्रकार का होता है, अंगदान और टिशू यानी ऊतकों का दान। अंगदान में शरीर के अंदरूनी हिस्सों का दान किया जाता है। जब कि ऊतक यानी टिशू दान में आमतौर पर आंख, कान, त्वचा, हड्डी और ह्रदय वाल्व से जुड़ा है। सामान्यत: व्यक्ति की मौत के बाद ही अंगदान किया जाता है, लेकिन कुछ अंगदान और टिशू दान जीवित रहने के दौरान भी कर सकते हैं।
किन अंगों का कर सकते हैं दान
दान किए जा सकने वाले अंगों में गुर्दे, यकृत, पैनक्रियाज, फेफड़े और दिल शामिल होते हैं, जबकि ऊतक की बात करें तो आंखों, त्वचा, हड्डी, अस्थि मज्जा, नसों, मस्तिष्क, हृदय वाल्व, कान का परदा, कान की हड्डियों और रक्त का दान कर सकते हैं।
क्या है अंगदान की प्रक्रिया
किसी व्यक्ति की ब्रेन डेथ की पुष्टि होने के बाद, डॉक्टर उसके घरवालों की इच्छा से शरीर से अंग निकाल लेता हैं। इससे पहले सभी कानूनी प्रकियाएं पूरी की जाती हैं। इस प्रक्रिया को एक निश्चित समय के भीतर पूरा करना होता है। ज्यादा समय होने पर अंग खराब होने शुरू हो जाते हैं। अंग निकालने की प्रक्रिया में अमूमन आधा दिन लग जाता है।
कितने समय में कर सकते हैं अंगदान
किसी भी अंग को डोनर के शरीर से निकालने के बाद 6 से 12 घंटे के अंदर को ट्रांसप्लांट कर देना चाहिए। कोई भी अंग जितना जल्दी प्रत्यारोपित होगा, उस अंग के काम करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है। लिवर निकालने के 6 घंटे के अंदर और किडनी 12 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट हो जाना चाहिए। वहीं आंखें 3 दिन के अंदर प्रत्यारोपण हो जाना चाहिए।
किस उम्र में अंगदान कर सकते हैं
अंगदान करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को अंगदान के लिए अपने माता-पिता या संरक्षक से इजाजत लेनी जरूरी है।
क्यों जरूरी है अंगदान
अंगदान पूरी तरह से आपकी सोच पर निर्भर करता है। यदि आप दूसरों को जीवन दान करना चाहते हैं तो यह अंगदान एक बेहतर विकल्प हो सकता है, आप जीवित रहते हुए मरने के बाद दूसरों को एक स्वस्थ जीवन दे सकते हैं। अंग की जरूरत किसी को भी हो सकती है वह आपका मित्र या परिवार को कोई सदस्य भी हो सकता है।
कैसे करें अंगदान
अंगदान के लिए दो तरीके हो सकते हैं। कई एनजीओ और अस्पतालों में अंगदान से जुड़ा काम होता है। इनमें से कहीं भी जाकर आप एक फॉर्म भरकर दे सकते हैं कि आप मरने के बाद अपने कौन से अंग दान करना चाहते हैं। जो अंग आप चाहेंगे केवल उसी अंग को लिया जाएगा। शरीर के किसी भी अंग को दान करने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।
अंग दान पर भारत की कानूनी स्थिति
भारतीय कानून द्वारा अंग दान कानूनी हैं। भारत सरकार ने मानव अंग अधिनियम 1994 के प्रत्यारोपण को अधिनियमित किया, जो अंग दान की अनुमति देता है, और 'मस्तिष्क की मृत्युÓ की अवधारणा को वैध बनाता है।
कैसे किसी के लिए मददगार है अंगदान
अंग प्राप्तकर्ताओं के लिए, प्रत्यारोपण का अर्थ जीवन में दूसरा मौका होता है। हृदय, पैनक्रिया, यकृत, गुर्दे और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंग उन लोगों के लिए प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं जिनके अंगों में काम करने की क्षमता समाप्त हो रही होती है। कुछ लोगों के लिए अंगदान जीवित रहने का एक मंहगा इलाज हो सकता है मगर ऐसा नहीं है। अंगदान से अंग प्राप्तकर्ता पहले जैसा सामान्य जीवन जी सकता है। उदाहरण के लिए, एक कॉर्निया या ऊतक का प्रत्यारोपण का अर्थ है, फिर से देखने की स्वतंत्रता।
भारत में अंगदान की चुनौतियां
भारत में अंगदान को लेकर तमाम तरह की चुनौतियां हैं। मसलन, डोनर का मिलान करना मुश्किल होता है। इसके अलावा नौकरशाही और जागरूकता की कमी से अंगदान एक मुश्किल प्रक्रिया बन जाती है। लंबी कागजी कार्यवाही की वजह से इसमें बाधा उत्पन्न होती है। अंधविश्वास भी एक बड़ी चुनौती है।

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