
पंजाबी सिंगर जस्सी गिल फिल्म 'हैप्पी फिर भाग जायेगी, से बॉलीवुड में कदम रख रहे है। ऐसे में उन्होंने उनके और दिलजीत दोसांझ के बीच कॉम्पिटिशन को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पर्दे पर सिख की धारणा को बदलने का काम किया है। जस्सी ने कहा, ''दिलजीत के साथ कॉम्पिटिशन या कंपेरिजन नहीं किया जा सकता है। हम दोनों अपना काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि लोगों को हम दोनों पर गर्व होना चाहिए क्योंकि हम पंजाब के रहने वाले हैं और फिल्म उद्योग में नाम कमा रहे हैं। मुझे लगता है कि दिलजीत ने यह सिद्ध किया है कि एक सामान्य सरदार भी बेहतर भूमिका निभा सकता है। इसके पहले सरदार को केवल हास्य कलाकार की भूमिका में दिखाया जाता था। सरदार का किरदार निभाने वाले लोग नकली पगड़ी पहनते थे। दिलजीत आए और धारणा को बदला। पंजाबियों को अक्सर 'शानदार,, 'विकी डोनर, और 'वीरे दी वेडिंग, जैसी कई हिंदी फिल्मों में खाने के शौकीन लोगों के तौर पर दिखाया जाता है।यह पूछे जाने पर कि क्या वह पंजाब की पृष्णभूमि पर बनी 'फिल्लौरी,, 'उड़ता पंजाब,, 'सूरमा, जैसी फिल्मों में बदलाव देखते हैं? इस पर जस्सी ने कहा, "हिंदी फिल्मों में पंजाबी कलाकारों के अधिक आने पर हमारे क्षेत्र का सही तरीके से प्रतिनिधित्व हो रहा है। मेरे जैसे और दिलजीत जैसे लोग जो पंजाब में पले-बढ़े, वे अपना मुकाम बनाने की कोशिश कर रहे हैं।"
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